एक मेरा ख़्वाब है जो बदलता भी नहीं है
कविता रावत
अक्टूबर 18, 2022
10
जो तेरे घर से निकलता भी नहीं है वो मेरी दहलीज़ पे चढ़ता भी नहीं है कहते हैं लोग मेरे सीने में मौजूद है मेरी मर्जी से मगर ये धड़कता भी नहीं है म...
और पढ़ें>>
क्या आपको यह रचना पसंद आई?
ऐसी ही और रचनाओं के लिए मुझसे जुड़ें: