August 2016 - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Wednesday, August 24, 2016

तीन लोक से मथुरा न्यारी यामें जन्में कृष्णमुरारी

August 24, 2016 19
मथुरा प्राचीनकाल से एक प्रसिद्ध नगर के साथ ही आर्यों का पुण्यतम नगर है, जो दीर्घकाल से प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केन्द्र रहा ह...
और पढ़ें>>

Saturday, August 13, 2016

स्वतंत्रता खोने वाले के पास कुछ नहीं बचता है

August 13, 2016 16
जो अपना स्वामी स्वयं नहीं, उसे  स्वतंत्र नहीं कहा जा सकता है । जिसे अत्यधिक स्वतंत्रता मिल जाय , वह सबकुछ चौपट करने लगता है...
और पढ़ें>>

Monday, August 8, 2016

हरेक वृक्ष नहीं फलवाला वृक्ष ही झुकता है

August 08, 2016 19
एक पक्ष की नम्रता बहुत दिन तक नहीं चल पाती है। एक बार शालीनता छोड़ने पर वह लौटकर नहीं आती है।। दूध में उफान आने पर वह चूल्हे पर जा गिरता ...
और पढ़ें>>