अक्टूबर 2010 - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपनी कविता, कहानी, गीत, गजल, लेख, यात्रा संस्मरण और संस्मरण द्वारा अपने विचारों व भावनाओं को अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का हार्दिक स्वागत है।

रविवार, 31 अक्टूबर 2010

मृगतृष्णा: शहर का मोहपाश

अक्टूबर 31, 2010 48
छोड़ गाँव की शीतल छाया, नगर ओर जो धावे, स्वप्न संजोकर नयनों में, निज भाग्य जगाने आवे। किन्तु यहाँ की आपाधापी, लील गई सब उल्लास, भीड़-भाड़ ...
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सोमवार, 4 अक्टूबर 2010

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