2009 - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Friday, December 25, 2009

Saturday, December 19, 2009

वक्त बदलेगा जरुर

December 19, 2009 19
मेहनत करना बहुत अच्छी बात है और अपनी- अपनी जगह सभी मेहनत करते हैं लेकिन उसका फल किसको कितना मिले, यह सब भाग्य पर निर्भर करता है. कर्म ...
और पढ़ें>>

Wednesday, December 16, 2009

देश की जो रीति पहले थी वह समझो अब तक है जारी

December 16, 2009 8
देश में एक ओर जहाँ शांतिप्रिय श्रीरामजी ने राज किया वहीँ दूसरी ओर अत्याचारी घमंडी रावण ने भी राज किया दोनों ओर ही थे धुरंधर यौद्धा और ...
और पढ़ें>>

Friday, December 11, 2009

Sunday, December 6, 2009

Friday, November 27, 2009

अहसास की पाती

November 27, 2009 14
30 नवम्बर को मेरी शादी की 14वीं सालगिरह है. इस अवसर पर हम विशेष धूमधाम तो नहीं, परन्तु हाँ बच्चों के साथ यही भोपाल में केरवा डैम (...
और पढ़ें>>

Friday, November 20, 2009

Thursday, November 12, 2009

दुर्जनता का भाव

November 12, 2009 16
समाज में व्याप्त उन प्राणियों से कैसे और कितने सुधार की उम्मीद की जा सकती है, जिनका स्वभाव ही दुर्जनता से भरा हो, जो अपनी आदत से मजबूर हो...
और पढ़ें>>

Sunday, November 8, 2009

Tuesday, November 3, 2009

Thursday, October 29, 2009

Tuesday, October 27, 2009

दाम करे सब काम

October 27, 2009 6
दाम करे सब काम पैसा मिलता घोड़ी चलती पार लगावे नैया बाप बड़ा न भैया सबको प्यारा है रुपैया! मेला लगता उदास जब पैसा न होता पास ठन-ठन...
और पढ़ें>>

Sunday, October 25, 2009

Saturday, September 26, 2009

असहाय वेदना

September 26, 2009 11
वो पास खड़ी थी मेरे दूर कहीं की रहने वाली, दिखती थी वो मुझको ऐसी ज्यों मूक खड़ी हो डाली। पलभर उसके ऊपर उठे नयन पलभर नीचे थे झपके, पसी...
और पढ़ें>>

Saturday, September 19, 2009

लाख बहाने

September 19, 2009 9
लाख बहाने पास हमारे सच भूल, झूठ का फैला हर तरफ़ रोग, जितने रंग न बदलता गिरगिट उतने रंग बदलते लोग। नहीं पता कब किसको किसके आगे रोना-झु...
और पढ़ें>>

Tuesday, September 15, 2009

इससे पहले कि

September 15, 2009 11
इससे पहले कि कोई आप से तुम और तुम से तू पर आकर अपनी कोई दिल बहलाने की चीज़ समझ बैठे संभल जाना इससे पहले कि कोई अपनी मीठी बातों में उलझा...
और पढ़ें>>

Thursday, September 10, 2009

समय

September 10, 2009 6
पंख होते हैं समय के पंख लगाकर उड़ जाता है पर छाया पीछे छोड़ जाता है भरोसा नहीं समय का न कुछ बोलता न दुआ सलाम करता है सबको अपने आगे झुकाकर चमत...
और पढ़ें>>

Sunday, August 2, 2009