'झ' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-1)
कविता रावत
अगस्त 05, 2026
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जीवन की इस आपाधापी में, कैसा यह फैला जाल है, कोई झाँसा देता पग-पग पर, कोई होता बेहाल है। चतुर यहाँ झपट्टा मार कर, सब कुछ झटक लेते हैं, भोले-...
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