मेरो गौं, मेरो पहाड़: यादों का एक सफर (पहाड़ी लोक-गीत)
कविता रावत
मार्च 10, 2026
0
ओ... छोड़ि मि शहर की भीड़-भाड़, अपुणी जड़ों की ओर गऊं बरसों बाद मैं आज दगड़ियो, अपुणी गौं का घर अऊं मन मा यादों की गठरी छै, आंखों मा वो बितय...
और पढ़ें>>
