पैसा और रिश्तों का पतन
कविता रावत
मई 05, 2026
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रिश्ते-नाते छूट रहे सब, पीछे खड़ा जमाना है, सबसे आगे दौड़ रहा यह, पैसा एक निशाना है। कभी हँसाता, कभी रुलाता, अद्भुत स्वांग रचाता है, पुतली जैस...
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