ज़िंदगी बीत गई अपनों को अपना करते | Heart Touching Hindi Ghazal
कविता रावत
सितंबर 15, 2026
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हँस भी लेते हैं दर्द अपना भुलाने के लिए, वरना रखा क्या है इस मतलबी ज़माने में। झूठ का शहर है और काँच की दीवारें हैं, आग लग जाती है अक्सर सच ...
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