नभ में गूँजे आज हिंदी, विश्व का सम्मान है,
ज्ञान का भंडार है यह, भारत की पहचान है।
सात समंदर पार इसकी, बढ़ रही अब धाक है,
संस्कृति का प्राण हिंदी, हर हृदय की साख है।
जन-जन की अभिलाषा हिंदी, गौरव का गान है,
विश्व पटल पर चमक रहा, जो वो हिंदुस्तान है।
प्रौद्योगिकी के दौर में भी, इसका लोहा मान रहे,
विश्व हिंदी दिवस पर आज, सब इसे पहचान रहे।
तुलसी, सूर और कबीर ने, सींचा इसको प्यार से,
अब यह भाषा जुड़ रही है, दुनिया के व्यापार से।
गूगल हो या एआई (AI), हिंदी का ही वास है,
आधुनिकता के संग चलता, इसका अटूट विश्वास है।
बोलें हिंदी, लिखें हिंदी, हिंदी में ही बात हो,
उन्नति के हर शिखर पर, बस इसी का हाथ हो।
संकल्प लें हम आज यह, इसे विश्व-व्यापी बनाएंगे,
हिंदी की इस पावन ज्योति को, घर-घर में जलाएंगे।
... कविता रावत

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