दिसंबर 2009 - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपनी कविता, कहानी, गीत, गजल, लेख, यात्रा संस्मरण और संस्मरण द्वारा अपने विचारों व भावनाओं को अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का हार्दिक स्वागत है।

बुधवार, 16 दिसंबर 2009

देश की वह रीति अब तक है जारी

दिसंबर 16, 2009 9
एक ओर जहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम राम का पावन शासन था, दूसरी ओर अभिमानी, अत्याचारी रावण का कुशासन था। दोनों ही पक्षों में महायोद्धा थे, निपुण धन...
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शुक्रवार, 11 दिसंबर 2009

गज़ल: "अपनेपन का साथ तो बस एक सपना भाता है"

दिसंबर 11, 2009 15
अक्सर मुझको तन्हाई का, हर एक लम्हा भाता है, अपनेपन का साथ तो बस एक, सुंदर सपना भाता है। पास मेरे तो केवल अश्कों की ही ये जागीर बची, वक्त-ब...
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रविवार, 6 दिसंबर 2009

यादों की डगर और अधूरे गीत

दिसंबर 06, 2009 12
हमने संजोए थे कुछ शब्द, कुछ अनकहे गीत, सिर्फ तुम्हें सुनाने को, तुम्हें रिझाने को। सोचा था जीवन के किसी मोड़ पर जब मिलेंगे, तो जी भर कर बात...
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