2013 - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

गुरुवार, 21 नवंबर 2013

रविवार, 8 सितंबर 2013

सामाजिक एकाकार का उत्सव : गणेशोत्सव

सितंबर 08, 2013 36
          हमारी भारतीय संस्कृति अध्यात्मवादी है, तभी तो उसका श्रोत कभी सूख नहीं पाता है। वह निरन्तर अलख जगाकर विपरीत परिस्थितियों को भ...
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शनिवार, 17 अगस्त 2013

सावन के झूले और उफनते नदी-नाले

अगस्त 17, 2013 23
ग्रीष्मकाल आया तो धरती पर रहने वाले प्राणी ही नहीं अपितु धरती भी झुलसने लगी। खेत-खलियान मुरझाये तो फसल कुम्हालाने लगी। घास सूखी तो फूलों...
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गुरुवार, 1 अगस्त 2013

मंगलवार, 9 जुलाई 2013

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।

जुलाई 09, 2013 46
धैर्य कडुवा लेकिन इसका फल मीठा होता है। लोहा आग में तपकर ही फौलाद बन पाता है।। एक-एक पायदान चढ़ने वाले पूरी सीढ़ी चढ़ जाते हैं। जल...
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शनिवार, 22 जून 2013

गुरुवार, 6 जून 2013

शनिवार, 1 जून 2013

शनिवार, 18 मई 2013

रविवार, 12 मई 2013

परशुराम-लक्ष्मण संवाद प्रसंग

मई 12, 2013 36
परशुराम जयंती को निकट आते देख मन मष्तिस्क के स्मृतिपटल से निकलकर रामलीला के कई दृश्य आँखों के सामने चलचित्र की तरह चलने लगते हैं, जिन...
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मंगलवार, 30 अप्रैल 2013