May 2014 - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Saturday, May 31, 2014

धुएं में फिक्र

May 31, 2014 21
कभी बचपन में हम बच्चों को दुबले-पतले, खांस-खांस कर बीड़ी फूंकते हुए बुजुर्गो के मुंह से बीड़ी खींच कर और फिर उन्हें यह कह कर चिढ़ाते हुए ...
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Wednesday, May 14, 2014

हम भोपाली

May 14, 2014 31
हम कहलाते हैं भोपाली मिनीबस की है कुछ बात निराली हम कुछ भी बकें इधर-उधर हर बात हमारी है निराली          हमसे बढ़ती शान हम कहलाते ...
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