मानव के लिए आत्मसम्मान की रोटी जरुरी
कविता रावत
मार्च 16, 2015
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एक बूढ़े कोढ़ी, लंगड़े को देखकर भला कौन काम देता। लेकिन पेट की आग जो लगातार धधकती रहती है, उसे बुझाने के लिए दो वक्त की रोटी तो जरूरी है...
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