November 2016 - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Wednesday, November 30, 2016

Tuesday, November 8, 2016

Thursday, November 3, 2016

बीते हुए दुःख की दवा सुनकर मन को क्लेश होता है

November 03, 2016 16
बड़े मुर्गे की तर्ज पर छोटा भी बांग लगाता है। एक खरबूजे को देख दूसरा भी रंग बदलता है।। एक कुत्ता कोई चीज देखे तो सौ कुत्ते उसे ही...
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