April 2010 - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Friday, April 23, 2010

Friday, April 16, 2010

Friday, April 9, 2010

तनिक सी आहट

April 09, 2010 29
तनिक सी आहट होती चौंक उठता आतुर मन जैसे आ गए वे जिसका रहता है दिल को अक्सर इन्तजार हर बार बार-बार बार-बार. वे दिल के ...
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Thursday, April 1, 2010

कड़ाके की घूप में

April 01, 2010 32
मैंने देखा है अक्सर कच्ची कलियों को चटकते हुए कड़ाके की घूप में कुछ कलियों को देखा है खिलखिलाते हुए बेमौसम में! वे कलियाँ जो भ्रमित...
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