प्रेम का अमिट रंग
कविता रावत
अप्रैल 16, 2010
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जब भी कौंधता है मानस में विचार हृदय में जागती है एक मीठी सी पीर। तुम उतरने लगते हो मुझमें गहराई तक, किसी सघन, चटख और गाढ़े रंग की लकीर। ...
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