October 2009 - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Thursday, October 29, 2009

Tuesday, October 27, 2009

दाम करे सब काम

October 27, 2009 6
दाम करे सब काम पैसा मिलता घोड़ी चलती पार लगावे नैया बाप बड़ा न भैया सबको प्यारा है रुपैया! मेला लगता उदास जब पैसा न होता पास ठन-ठन...
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Sunday, October 25, 2009