2011 - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Thursday, December 15, 2011

वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती......

December 15, 2011 148
जिंदगी में हमारी अगर दुशवारियाँ नहीं होती हमारे हौसलों पर लोगों को हैरानियाँ नहीं होती चाहता तो वह मुझे दिल में भी रख सकता था मुनासिब ह...
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Friday, December 2, 2011

Friday, November 11, 2011

अभिमान ऐसा फूल जो शैतान की बगिया में उगता है....

November 11, 2011 72
जहाँ उत्कृष्टता पाई जाती है वहाँ अभिमान आ जाता है। अभिमान आदमी की अपनी त्रुटियों का मुखौटा होता है।। बन्दर के हाथ हल्दी की गांठ लगी वह पंस...
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Monday, October 24, 2011

Friday, October 14, 2011

गरीब, कमजोर पर हर किसी का जोर चलने लगता है!

October 14, 2011 78
स्वर्ण लदा गधा किसी भी द्वार से प्रवेश कर सकता है। शैतान से न डरने वाला आदमी धनवान बन जाता है ।। अक्सर धन ढेर सारी त्रुटियों में...
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Tuesday, October 4, 2011

बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अवतार प्रयोजन : विजयादशमी

October 04, 2011 58
बदलती परिस्थितियों में बदलते आधार भगवान को भी अपनाने पड़े हैं। विश्व विकास की क्रम व्यवस्था के अनुरूप अवतार का स्तर एवं कार्यक्षेत्र भी व...
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Sunday, September 11, 2011

Tuesday, August 23, 2011

तिहरे धागे को तोड़ना आसान नहीं है

August 23, 2011 80
जो अपने आप गिर जाता है वह चीख़-पुकार नहीं मचाता है।  जो धरती पर टिका हो वह कभी उससे नीचे नहीं गिरता है। ।  नदी पार करने वाले उसकी गह...
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Tuesday, July 26, 2011

Saturday, July 2, 2011

Wednesday, June 1, 2011

खुशमिजाज बुलबुल का मेरे घर आना

June 01, 2011 80
जेठ की तन झुलसा देने वाली दुपहरी में लू की थपेड़ों से बेखबर मेरे द्वार पर मनीप्लांट पर हक़ जमाकर उसके झुरमुट में अपना घरौंदा बना कर बै...
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Friday, May 20, 2011

Tuesday, April 26, 2011

सदियों से फलता-फूलता कारोबार : भ्रष्टाचार

April 26, 2011 61
भ्रष्टाचार! तेरे रूप हजार सदियों से फलता-फूलता कारोबार देख तेरा राजसी ठाट-बाट कौन करेगा तेरा बहिष्‍कार ! बस नमस्कार, नमस्‍कार ! र...
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Sunday, April 3, 2011

धुन के पक्के इन्सां ही एक दिन चैंपियन बनते हैं

April 03, 2011 50
जीत और हार के बीच झूलते, डूबते-उतराते विपरीत क्षण में भी अविचल, अविरल भाव से लक्ष्य प्राप्ति हेतु आशावान बने रहना बहुत मुश्किल पर न...
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Saturday, March 19, 2011

जल बिन भर पिचकारी कैसे खेलें होली ........

March 19, 2011 59
बच्चों की परीक्षा समाप्ति के दो दिन बाद ही परिणाम भी। और फिर होली के दूसरे दिन से ही नए सत्र का आरंभ, मतलब भागम-भागम नहीं तो और क्या! स...
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Wednesday, March 2, 2011

Thursday, February 17, 2011