2010 - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Monday, December 27, 2010

Monday, December 13, 2010

Tuesday, November 30, 2010

घर-गृहस्थी और समाज

November 30, 2010 34
बचपन की धमाचौकड़ी के साथ स्कूली शिक्षा और फिर कॉलेज की चकाचौंध से बाहर निकलकर जब मैं कुछ वर्ष बाद परिवार और नाते रिश्तेदारों की दिन-रा...
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Tuesday, November 23, 2010

इससे पहले कि कोई

November 23, 2010 51
इससे पहले कि कोई आप, तुम से तू पर आता हुआ दिल बहलाने की चीज़ समझ बैठे संभल जाना इससे पहले कि कोई मीठी बातों में उलझा कर गलत राह पर मजब...
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Saturday, November 13, 2010

Thursday, November 4, 2010

Sunday, October 31, 2010

Thursday, October 21, 2010

मरना आसान लेकिन जीना बहुत कठिन है

October 21, 2010 38
पिछले सप्ताह एक के बाद एक तीन निकट सम्बन्धियों के मृत्यु समाचार से मन बेहद व्यथित है. कभी घर कभी बाहर की दौड़-भाग के बीच दिन-रात कैसे गुज...
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Friday, October 8, 2010

नवरात्रि : भक्ति और शक्ति का उत्सव

October 08, 2010 42
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवी दुर्गे देवि नमोsस्तु ते ।। सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। ...
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Monday, October 4, 2010

Thursday, September 30, 2010

दुष्ट प्रवृत्ति वालों को उजाले से नफरत होती है

September 30, 2010 47
एक जगह पहुंचकर अच्छे और बुरे में बहुत कम दूरी रह जाती है इने-गिने लोगों की दुष्टता सब लोगों के लिए मुसीबत बन जाती है ! दुष्ट   प्रवृत्त...
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Sunday, September 26, 2010

अपनेपन की भूल

September 26, 2010 39
जिन्हें हम अपना समझते हैं गर आँखों में उनकी झाँककर देखते हैं तो दिखता क्यों नहीं हरदम आँखों में उनके पहला सा प्यार? एक पल तो सब अपने से...
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Saturday, September 18, 2010

Friday, September 10, 2010

Saturday, September 4, 2010

कौन हो तुम

September 04, 2010 37
कौन हो तुम! पहले पहल प्यार करने वाली शीत लहर सी सप्तरंगी सपनों का ताना-बाना बुनती चमकती चपला सी शरद की चांदनी सी गुलाब की पंखुड़ियों...
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Saturday, August 28, 2010

Sunday, August 15, 2010

बचपन के स्वत्रंत्रता दिवस का वह एक दिन

August 15, 2010 38
शहर की महज औपचारिक दिशा की और निरंतर अग्रसर होती स्वत्रंत्रता दिवस की एक दिवसीय चकाचौध के बीच बचपन में गाँव के स्कूल में मनाये जाने वाले...
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Sunday, August 8, 2010

मनभावन वर्षा

August 08, 2010 36
मुरझाये पौधे भी खिल उठते जब उमड़- घुमड़ बरसे पानी, आह! इन काली घटाओं की दिखती हरदम अजब- गजब की मनमानी। देख बरसते बादलों को ऊपर मलि...
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Sunday, August 1, 2010

Tuesday, July 27, 2010

Monday, July 19, 2010

Friday, July 2, 2010

Monday, June 7, 2010

Tuesday, June 1, 2010

बिन पानी सब सून

June 01, 2010 28
कहाँ जा रहा है मुआ ये ज़माना किसको बताएं, क्‍या क्‍या बताना! लग रहा है बिन पानी सब सून न दाल गल रही है और न चून सुबह उठकर नल के पास ...
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Saturday, May 22, 2010

Saturday, May 15, 2010