मित्र और मित्रता : एक नज़र - KAVITA RAWAT
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Sunday, August 1, 2010

मित्र और मित्रता : एक नज़र















मैत्री बहुत उदार होती है पर प्रेम कृपण होता है
मित्र के घर का रास्ता कभी लम्बा नहीं होता है

मित्र के लिए जो भार उठाया वह हल्का मालूम होता है
जो मित्रों का भला करे वह अपना ही भला करता है

बिना विश्वास कभी मित्रता चिर स्थाई नहीं रहती है
मैत्री में महज औपचरिकता अधूरेपन को दर्शाती है

दूसरों से तुलना करने पर दोस्त भी दुश्मन बन जाता है
दो मित्रों के विवाद में निर्णायक बन एक गंवाना पड़ता है

मित्र वही जो भर्त्सना एकांत में पर प्रशंसा सबके सम्मुख करता है
सच्चा मित्र दूसरों को हमारे गुण पर अवगुण हमें बताता है

जो उपहार में मित्र खरीदते हैं उन्हें दूसरे कोई खरीद ले जाते हैं
मित्र सांरगी के तार हैं ज्यादा कसने पर टूटकर बिखर जाते हैं

अनपरखे मित्र अनतोड़े अखरोट के तरह होते हैं
विपत्ति में सच्चे-झूठे मित्र पहचान लिए जाते हैं

झूठे मित्रों की जुबाँ मीठी लेकिन दिल बहुत कडुवे होते हैं
झूठे मित्र व परछाई सूरज चमकने तक ही साथ रहते हैं

मित्रों का चयन थोड़े पर चुनिंदा पुस्तकों की भांति कर लिया
तो समझो जिंदगी में हमने एक साथ बहुत कुछ पा लिया

                             ......कविता रावत

47 comments:

kshama said...

मित्रों का चयन थोड़े पर चुनिंदा पुस्तकों की भांति कर लिया
तो समझो जिंदगी में हमें एक साथ बहुत कुछ पा लिया
Dosti ka sara saar isme aa gaya!

Shah Nawaz said...

बेहतरीन रचना, बहुत खूब!

mukti said...

बहुत अच्छी सूक्तियाँ हैं.

संजय भास्‍कर said...

kshama ji bilkul sahi kaha...mitro ka chayan kitabo ki bhati ki karna chahiye....

अविनाश वाचस्पति said...

मित्रता के झंकृत कर दिए अधिकाधिक तार।

Arvind Mishra said...

बहुत सुन्दर आनुभूतिक सत्य ,निचोड़ ,-आभार !

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून said...

सुंदर.

Unknown said...

waah !!!.....dosti par bahut hi lajwaab rachna .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मित्रता को स्पष्ट करती सुन्दर बातें ....


मैत्री बहुत उदार होती है पर प्रेम कृपण होता है
मित्र के घर का रास्ता कभी लम्बा नहीं होता है

सटीक....वैसे सटीक तो सब हैं पर यह बात बहुत कुछ कह गयी

Darshan Lal Baweja said...

बेहतरीन रचना, बहुत खूब!

अजय कुमार झा said...

बहुत ही सुंदर बातें और शानदार अभिव्यक्ति..........आज के लिए सर्वथा उपयुक्त

रश्मि प्रभा... said...

मित्र के घर का रास्ता कभी लम्बा नहीं होता है
n umra, n sthiti, n jati ... koi baadha nahi hoti , dost dost hota hai
dosti ke din kee shubhkamnayen

वाणी गीत said...

झूठे मित्रों की जुबाँ मीठी लेकिन दिल बहुत कडुवे होते हैं
झूठे मित्र व परछाई सूरज चमकने तक ही साथ रहते हैं

मित्रों का चयन थोड़े पर चुनिंदा पुस्तकों की भांति कर लिया
तो समझो जिंदगी में हमने एक साथ बहुत कुछ पा लिया ...

मित्रता को परखती , व्याख्या करती अच्छी रचना ...!

संजय भास्‍कर said...

dosti par ek sher pes hai..

मन में आपके हर बात रहेगी
बस्ती छोटी है मगर आबाद रहेगी
चाहे हम भुला दे ज़माने को
मगर ये प्यारी सी दोस्ती हमेशा याद रहेगी

kavita ji
visit my own blog..
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Awadhesh Pandey said...

मित्रों का चयन थोड़े पर चुनिंदा पुस्तकों की भांति कर लिया
तो समझो जिंदगी में हमने एक साथ बहुत कुछ पा लिया
===
Ati uttam, kuch mitra hamne bhi banaye hain.
Dhanyvad.

Sunil Kumar said...

बिना विश्वास कभी मित्रता चिर स्थाई नहीं रहती है
मैत्री में महज औपचरिकता अधूरेपन को दर्शाती है सही बात अच्छी रचना बधाई

वन्दना अवस्थी दुबे said...

मैत्री बहुत उदार होती है पर प्रेम कृपण होता है
मित्र के घर का रास्ता कभी लम्बा नहीं होता है
बहुत सुन्दर रचना है कविता जी. मित्रता-दिवस आपको भी बहुत-बहुत मुबारक है.

V.P. Singh Rajput said...

बहुत सुंदर जी

रचना दीक्षित said...

बहुत सुन्दर आनुभूतिक, सुंदर बातें और शानदार अभिव्यक्ति

राजेश उत्‍साही said...

शुभकामनाएं।

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

बहुत अच्छी सूक्तियाँ हैं.

मनोज कुमार said...

हैप्पी फ़्रेंडशिप डे!

सम्वेदना के स्वर said...

कविता जी,
बहुत छाँटकर और छानकर आपने ये सूक्तियाँ प्रस्तुत की हैं... धन्यवाद!

Deepak Shukla said...

Mitr jinhe kahti hai duniya..
Sukh dukh main saati hote..
Chahe sang main rahte hon ya..
Chahe door kahin hote..

Mitrta divas ki hardik shubhkamnayen..

Deepak..

सुज्ञ said...

मैत्री पर ज्ञानवर्धक सूक्तियां
मित्र दिवस का अन्मोल उपहार।
आभार,आभार,आभार

Rohit Singh said...

बिना विश्वास कभी मित्रता चिर स्थाई नहीं रहती है
मैत्री में महज औपचरिकता अधूरेपन को दर्शाती है

यही विश्वाश होता है जो किसी भी चीज के लिए जरुरी है। कहते हैं न कि दोस्ती में जान दी जाती है तो ली जाती है। दोस्ती बेमिसाल होती है। अनमोल होती है। पर अर्थ की नगरी में दोस्त मिलना काफी मुश्किल होता है। दोस्ती सही में कच्चे अखरोट की तरह होती है।

nilesh mathur said...

ये सिर्फ एक रचना नहीं, मित्रता दिवस का तोहफा है, बहुत सुन्दर, शुभकामना!

मनोज कुमार said...

02.08.10 की चिट्ठा चर्चा में शामिल करने के लिए इसका लिंक लिया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

Udan Tashtari said...

सभी उत्तम विचार!

मित्र दिवस की बधाई.

Satish Saxena said...

मित्र आचरण पर लिखी यह उक्तियाँ शोध के लिए बहुत उपयोगी हैं , शायद ही कुछ छोड़ा गया है इस रचना में ! मगर आज के समय में मित्र की आवश्यकता किसे है ? अधिकतर जरूरत पड़ने पर ही मित्र की याद आती है ...
शुभकामनायें कविता जी !

विनोद कुमार पांडेय said...

एक सच्चे मित्र का चयन बहुत मुश्किल है चंद मुलाक़ातों में किसी को मित्र बना लेना एक सच्ची मित्रता की पहचान नही हो सकती मित्र की पहचान तो तब होती है जब वा दुख में भी साथ दे...

बढ़िया रचना..बधाई

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

रचना का उपदेशात्मक अनोखा अंदाज पसंद आया कविता जी !

पी.एस .भाकुनी said...

शानदार अभिव्यक्ति..........

मुकेश कुमार सिन्हा said...

dosti ko samarpit post ke liye bahut bahut badhai!!

sundar rachna!

अनामिका की सदायें ...... said...

मित्रता पर लिखी ये बाते बिलकुल सही हैं. बढ़िया प्रस्तुति.

M VERMA said...

अनपरखे मित्र अनतोड़े अखरोट के तरह होते हैं
विपत्ति में सच्चे-झूठे मित्र पहचान लिए जाते हैं
सटीक
बहुत खूब

Anonymous said...

सदविचार

hem pandey said...

मित्रता विस्तार से परिभाषित हो गयी.

KK Yadav said...

दोस्ती पर शानदार रचना..बधाई.

Urmi said...

बहुत ख़ूबसूरत और लाजवाब रचना लिखा है आपने! बधाई!

www.dakbabu.blogspot.com said...

एक बार फिर से बधाई...
कभी 'डाकिया डाक लाया' पर भी आयें...

कुमार राधारमण said...

मैत्री प्रेम से ऊपर है। गोपियां पीछे छूट गई थीं;मगर सुदामा का ध्यान कृष्ण को था।

अंजना said...

बेहतरीन रचना.

सूफ़ी आशीष/ ਸੂਫ਼ੀ ਆਸ਼ੀਸ਼ said...

सत्य वचन!

शरद कोकास said...

यह बहुत अच्छे बयान हैं

Deepak Shukla said...

Hi..

Mitr jinhe kahti hai duniya...
Sukh dukh main saathi hote...
Chahe sang main rahte hon ya...
Chahe door kahin hote...

Bahut hi sundar Kavita...

Deepak...

Sudesh Bhatt said...

भाव पूर्ण सुन्दर लेखन, आप का ब्लॉग पढ़ा अच्छा लगा,
ब्लॉग में प्रयोग की गयी गावं की तस्वीरें देख कर अपना गांव याद आया ,शुभकामनायें कविता जी