तनिक सी आहट - KAVITA RAWAT
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Friday, April 9, 2010

तनिक सी आहट











तनिक सी आहट होती
चौंक उठता आतुर मन
जैसे आ गए वे
जिसका रहता है
दिल को अक्सर
इन्तजार
हर बार
बार-बार
बार-बार.

वे दिल के करीब रहकर भी
कभी-कभी जाने क्यों?
दूर दूर नज़र आते हैं
अपनों के बीच रहकर
कभी-कभी जाने क्यों?
अजनबी से दिखते हैं
यह देख उठती दिल में
गहरी टीस
अति धारदार
हर बार
बार-बार
बार-बार.

गुजरे करीब से जब भी वे
तन-मन में सिहरन सी उठती है
थोड़ी सी निगाह पड़ी जब भी
सीधे दिल पर वार करती है
पागल मन बुनता सप्तरंगी सपने
भागता पीछे-पीछे
और फिर बहती प्रेमनद
बन अति तीव्रधार
हर बार
बार-बार
बार-बार.

-कविता रावत

29 comments:

Apanatva said...

naya rang liye ye rachana pyaree lagee............meethe se ahsaas kee chubhan jiye.........

arvind said...

दिल के करीब रहकर भी
कभी-कभी जाने क्यों?
दूर दूर नज़र आते हैं
अपनों के बीच रहकर
कभी-कभी जाने क्यों?
अजनबी से दिखते हैं
....bahut sundar rachna.

वाणी गीत said...

पागल मन बुनता सप्तरंगी सपने
भागता पीछे-पीछे
और फिर बहती प्रेमनद
बन अति तीव्रधार...
दिल के करीब रहकर दूर रहने वाले ....
अपनों के करीब रहकर अजनबी रहने वाले
यही तो है रिश्तों की मायानगरी ...
अच्छी कविता ...!!

मनोज कुमार said...

कविता सिर्फ महसूस की जा सकती है । इस कविता को मस्तिस्क से न पढ़कर बोध के स्तर पर पढ़ना जरूरी है।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है....बहुत खूबसूरत रचना...बधाई

rashmi ravija said...

गुजरे करीब से जब भी वे
तन-मन में सिहरन सी उठती है
थोड़ी सी निगाह पड़ी जब भी
सीधे दिल पर वार करती है
पागल मन बुनता सप्तरंगी सपने
अनछुए अहसास लिए हुए सुन्दर कविता

संजय भास्‍कर said...

तनिक सी आहट होती
चौंक उठता आतुर मन
जैसे आ गए वे
जिसका रहता है
दिल को अक्सर

,,,,,,,,अच्छी कविता ...!!

संजय भास्‍कर said...

किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

kunwarji's said...

बहुत बढ़िया,
बड़ी खूबसूरती से कही अपनी बात आपने.....

कुंवर जी,

सुशील छौक्कर said...

सुन्दर भावों को बखूबी शब्द जिस खूबसूरती से तराशा है। काबिले तारीफ है।

रश्मि प्रभा... said...

अपनों के बीच रहकर
कभी-कभी जाने क्यों?
अजनबी से दिखते हैं
ye hui shaandaar rachna, shaandaar abhivyakti

अंजना said...

अच्छी रचना...बधाई

vandan gupta said...

मनोभावो को बखुबी बाँधा है।

दिगम्बर नासवा said...

रिस्तों की उधेड़बुन ऐसी ही होती है ... कभी कुछ तो कभी कुछ ...
बहुत अच्छी अभिव्यक्ति है ...

Alpana Verma said...

सुन्दर ,सरल शब्दों के माध्यम से गहन बात कह दी है ..ऐसी उलझन अक्सर सभी को होती होगी.

कडुवासच said...

...बहुत सुन्दर, प्रसंशनीय रचना!!!

Ashok Kumar pandey said...

संवेदनशील वक्तव्य!

रचना दीक्षित said...

गुजरे करीब से जब भी वे
तन-मन में सिहरन सी उठती है
थोड़ी सी निगाह पड़ी जब भी
सीधे दिल पर वार करती है
पागल मन बुनता सप्तरंगी सपने
भागता पीछे-पीछे
और फिर बहती प्रेमनद
बन अति तीव्रधार
हर बार
बार-बार
बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

vijay kumar sappatti said...

kavita ji ,

bahut hi sanvedansheel rachna . man ke bheetar kahin chooti hui ... aur na jaane kitne saare shabdo ke ahsaas ko gunjan deti hui ....
aabhar aapka

vijay

Anonymous said...

आपकी दोनों नई रचनाओं और ४-५ महीने पहले की रचनाओं में मुझे तो हर द्रष्टिकोण से बहुत ज्यादा फर्क नजर आ रहा है - हार्दिक शुभकामनाएं - keep it up.

पूनम श्रीवास्तव said...

Komal bhavanaon kee bahut sundar aur sahaj prastuti---badhiya kavita----.

Satish Saxena said...

कुछ अलग हठ कर है यह रचना, शुभकामनायें !

ज्योति सिंह said...

वे दिल के करीब रहकर भी
कभी-कभी जाने क्यों?
दूर दूर नज़र आते हैं
अपनों के बीच रहकर
कभी-कभी जाने क्यों?
अजनबी से दिखते हैं
यह देख उठती दिल में
गहरी टीस
अति धारदार
हर बार
बार-बार
बार-बार.
ati uttam ,behad khoobsurat

M VERMA said...

अलग सी शैली की रचना. कुछ कुछ ध्वन्यात्मक भी

सूफ़ी आशीष/ ਸੂਫ਼ੀ ਆਸ਼ੀਸ਼ said...

तनिक सी आहट होती
चौंक उठता आतुर मन
जैसे आ गए वे
जिसका रहता है
दिल को अक्सर
इन्तजार
हर बार
बार-बार
बार-बार.
Wo aaye?
Sadhuwad!

Digvijay Agrawal said...

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार 18 नवंबर 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Rohitas Ghorela said...

ये प्रेम नदी कभी सुख नहीं सकती है।
भावों को बखूबी शब्दों में ढाला है।

Anuradha chauhan said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

SUJATA PRIYE said...

जी बेहतरीन रचना