कौन हो तुम - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Saturday, September 4, 2010

कौन हो तुम

कौन हो तुम!
पहले पहल प्यार करने वाली
शीत लहर सी
सप्तरंगी सपनों का ताना-बाना बुनती
चमकती चपला सी
शरद की चांदनी सी
गुलाब की पंखुड़ियों सी
काँटों की तीखी चुभन से बेखबर
मरू में हिमकणों को तराशती
कौन हो तुम!

अधर दांतों में दबाती
नयन फैलाती
घनघोर घटाओं में सूरज का
इन्तजार करती
अरमानों को
आंचल बांधे
मिलन की तीव्र
साधना में रत
प्रेम उपासना को उद्धत
जिंदगी के सुहावने सपनों में
खोई-सोई दिखने वाली
कौन हो तुम!

खुद से बेखबर
उबड़-खाबड़ राहों से जानकर अनजान
कठोर धरातल पर नरम राह तलाशती
जिंदगी के आसमान को
चटख सुर्ख रंगों से
रंगने को आतुर-व्याकुल
कौन हो तुम!

             ......कविता रावत







37 comments:

राजभाषा हिंदी said...

सुंदर शब्दों एवं भावाभिव्यक्ति से बुनी एक बहुत अच्छी कविता।

हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

स्‍वच्‍छंदतावाद और काव्‍य प्रयोजन , राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

पी.एस .भाकुनी said...

khubsurat shabdon main piroi gai ek sunder kavita......nice

रश्मि प्रभा... said...

खुद से बेखबर
उबड़-खाबड़ राहों से जानकर अनजान
कठोर धरातल पर नरम राह तलाशती
जिंदगी के आसमान को
चटख सुर्ख रंगों से
रंगने को आतुर-व्याकुल
कौन हो तुम!
bahut khoobsurat dil tak indradhanushi chhata bikherte ehsaas

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

जिंदगी के आसमान को
चटख सुर्ख रंगों से
रंगने को आतुर-व्याकुल
कौन हो तुम!


पहचान को तलाशती बढ़िया भाव-पूर्ण कविता !











Posted by कविता रावत at 8:39 AM 3 comments:
राजभाषा हिंदी said...
सुंदर शब्दों एवं भावाभिव्यक्ति से बुनी एक बहुत अच्छी कविता।

हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

स्‍वच्‍छंदतावाद और काव्‍य प्रयोजन , राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

September 4, 2010 8:52 AM
P S Bhakuni (Paanu) said...
khubsurat shabdon main piroi gai ek sunder kavita......nice

September 4, 2010 9:12 AM
रश्मि प्रभा... said...
खुद से बेखबर
उबड़-खाबड़ राहों से जानकर अनजान
कठोर धरातल पर नरम राह तलाशती
जिंदगी के आसमान को
चटख सुर्ख रंगों से
रंगने को आतुर-व्याकुल
कौन हो तुम!

Anonymous said...

सुंदर शब्दों में पिरोये गुलाबी अहसास

मनोज कुमार said...

आप का समर्थ सर्जक हैं।
आपके संकल्‍प और चयन की क्षमता से आपकी रचनाधर्मिता ओत-प्रोत है।

फ़ुरसत में .. कुल्हड़ की चाय, “मनोज” पर, ... आमंत्रित हैं!

राजेश उत्‍साही said...

हमारा सवाल भी यही है। कौन हो तुम।
ब्‍लाग टेम्‍पलेट का परिवर्तन भी अच्‍छा लगा।

सम्वेदना के स्वर said...

इस तलाश को मंज़िल चाहें जब मिलें, पर यह तलाश बहुत
खूबसूरत है, आपकी कविता की तरह!!

Surendra Singh Bhamboo said...

खुद से बेखबर
उबड़-खाबड़ राहों से जानकर अनजान
कठोर धरातल पर नरम राह तलाशती
जिंदगी के आसमान को
चटख सुर्ख रंगों से
रंगने को आतुर-व्याकुल
कौन हो तुम!

अति सुन्दर मन भावन रचना है आपकी

हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

मालीगांव
साया

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सतरंगी सी ..एक तलाश ...कौन हो ? सुन्दर भावाभिव्यक्ति

vijay said...

अधर दांतों में दबाती
नयन फैलाती
घनघोर घटाओं में सूरज का
इन्तजार करती
अरमानों को
आंचल बांधे
मिलन की तीव्र
साधना में रत
प्रेम उपासना को उद्धत
जिंदगी के सुहावने सपनों में
खोई-सोई दिखने वाली
कौन हो तुम!
....सुन्दर भावाभिव्यक्ति

Unknown said...

कौन हो तुम!
पहले पहल प्यार करने वाली
शीत लहर सी
सप्तरंगी सपनों का ताना-बाना बुनती
चमकती चपला सी
शरद की चांदनी सी
गुलाब की पंखुड़ियों सी
काँटों की तीखी चुभन से बेखबर
मरू में हिमकणों को तराशती
कौन हो तुम!
....so nice love emotion

Udan Tashtari said...

कौन हो तुम...सुन्दर अभिव्यक्ति!

Shah Nawaz said...

अरे वाह! बहुत ही बेहतरीन रचना...


मेरी ग़ज़ल:
मुझको कैसा दिन दिखाया ज़िन्दगी ने

अनामिका की सदायें ...... said...

सुंदर शब्दों से सजाया है इस कौन को...प्रभावशाली अभिव्यक्ति ...जो मजबूर कर रही है सोचने पर....कौन हें वो ?

हास्यफुहार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

शिक्षा का दीप जलाएं-ज्ञान प्रकाश फ़ैलाएं

शिक्षक दिवस की बधाई

संडे की ब्लाग4वार्ता--यशवंत की चाय के साथ--आमंत्रण है…।

दिगम्बर नासवा said...

ये तो जीवन की आशा की महक है शायद ...
बहुत सुंदर रचना है ...

Coral said...

बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुती !

रचना दीक्षित said...

खुद से बेखबर
उबड़-खाबड़ राहों से जानकर अनजान
कठोर धरातल पर नरम राह तलाशती
जिंदगी के आसमान को
चटख सुर्ख रंगों से
रंगने को आतुर-व्याकुल
कौन हो तुम!
एक अच्छी सतरंगी तलाश. शब्दों का सुन्दर संयोजन.भावपूर्ण प्रस्तुती

Urmi said...

बहुत सुन्दर और शानदार प्रस्तुती!
शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

ZEAL said...

Beautiful creation .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

इस बार के ( 7 सितम्बर , मंगलवार ) साप्ताहिक चर्चा मंच पर आप विशेष रूप से आमंत्रित हैं ...आपके लिए कुछ विशेष है ....आपकी उपस्थिति नयी उर्जा प्रदान करती है .....मुझे आपका इंतज़ार रहेगा....
शुक्रिया

माधव( Madhav) said...

तस्वीर दिल्ली मेट्रो की है ना !

shailendra said...

खुद से बेखबर
उबड़-खाबड़ राहों से जानकर अनजान
कठोर धरातल पर नरम राह तलाशती
जिंदगी के आसमान को
चटख सुर्ख रंगों से
रंगने को आतुर-व्याकुल
कौन हो तुम
..बहुत अच्छी प्रस्तुति।

ZEAL said...

Read it again and found it all the more beautiful.

डिम्पल मल्होत्रा said...

sabhi kisi na kisi tlaash me hai....

निर्मला कपिला said...

खुद से बेखबर
उबड़-खाबड़ राहों से जानकर अनजान
कठोर धरातल पर नरम राह तलाशती
जिंदगी के आसमान को
चटख सुर्ख रंगों से
रंगने को आतुर-व्याकुल
कौन हो तुम!
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति। शुभकामनायें

राज भाटिय़ा said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून said...

वाह जी बहुत सुंदर.

Asha Joglekar said...

पहले पहल प्यार करने वाली
शीत लहर सी
सप्तरंगी सपनों का ताना-बाना बुनती
चमकती चपला सी
शरद की चांदनी सी
गुलाब की पंखुड़ियों सी
काँटों की तीखी चुभन से बेखबर
मरू में हिमकणों को तराशती
कौन हो तुम!
wah shraddhaji kitane sunder upman aur utanihi sunder rachna.

सूफ़ी आशीष/ ਸੂਫ਼ੀ ਆਸ਼ੀਸ਼ said...

कविता जी,
नमस्ते!
कोई गूढ़ बात समझने की मेरी हैसियत नहीं....
अपने लेवल पे यही कह सकता हूँ, बेहतरीन शब्द संयोजन...
चित्र उकेरने में सक्षम!
आशीष

ghughutibasuti said...

बहुत सुन्दर!
घुघूती बासूती

Asha Lata Saxena said...

बहुत सुंदर भावों को सजोती कविता |भाव पूर्ण अभिव्यक्ति|
आशा

Unknown said...

कौन हो तुम! ek khubasurat jindagi !
arganikbhagyoday.blogspot.com

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

कविता जी,
बहुत अच्छी रचना पेश की है...
बधाई.

Anonymous said...

Criteria of those loans are actually easy and you take lower
than half an hour or so in meeting the approval not fake would you
realize if your person standing next to you was going to pull out a gun and shoot.