इससे पहले कि कोई - KAVITA RAWAT
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Tuesday, November 23, 2010

इससे पहले कि कोई

इससे पहले कि कोई
आप, तुम से तू पर आता हुआ
दिल बहलाने की चीज़ समझ बैठे
संभल जाना
इससे पहले कि कोई
मीठी बातों में उलझा कर
गलत राह पर मजबूर करने लगे
समझ जाना
इससे पहले कि कोई
घर में घुसकर
अपनों में फूट डालने लगे
भांप जाना
इससे पहले कि किसी की कोई
बात चुभने लगे
बातों पर अपनी ध्यान देना
इससे पहले कि कोई
अपमानित होने के क्षण आएं
सबका मान रखना
इससे पहले कि हर कोई
कतरा के चलने लगे
इतरा के न चलना
इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना
इससे पहले कि कोई
नफरत भरी निगाहों से देखे
प्यार में संभल कर चलना
इससे पहले कि दुनिया में
कहीं बदनाम हो जाएं
अपने नाम का मान रखना
इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना

               ..कविता रावत

51 comments:

डॉ. मोनिका शर्मा said...

इससे पहले कि दुनिया में
कहीं बदनाम हो जाएं
अपने नाम का मान रखना
इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना

बेहतरीन...... इतनी सटीक और प्रासंगिक प्रस्तुति ..... बहुत खूब रचना बहुत अच्छी लगी कविता जी ...

संजय भास्‍कर said...

कविता जी
नमस्कार !
आपकी कविता पढ़कर मन अभिभूत हो गया ,
शब्द नहीं हैं इनकी तारीफ के लिए मेरे पास.........बहुत सुन्दर

रश्मि प्रभा... said...

excellent

संजय भास्‍कर said...

घर में घुसकर
अपनों में फूट डालने लगे
भांप जाना
इससे पहले कि किसी की कोई
बात चुभने लगे
बातों पर अपनी ध्यान देना
इससे पहले कि कोई
अपमानित होने के क्षण आएं
सबका मान रखना
इससे पहले कि हर कोई
....प्रासंगिक प्रस्तुति गहरी बात कह दी आपने।

केवल राम said...

इससे पहले कि कोई
नफरत भरी निगाहों से देखे
प्यार में संभल कर चलना
कविता जी
बेहद प्रभावशाली रचना है जीवन से जुडी हुई...हर एक लफ्ज सन्देश से भरा है ..उस पर प्रस्तुतीकरण ..क्या गजब है ...शुक्रिया

Anonymous said...

hr kadam pr upyogi sandesh deti uprokt rachna hetu abhaar.......bloging ka ek alag hi andaaz hai aapka isey banaye rakhiyega.
shubhkaamnayen........

(P.S.Bhakuni)

राजेश उत्‍साही said...

इससे पहले कि कोई....

दिगम्बर नासवा said...

इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना...

बहुत खूब .. सजग प्रहरी की तरह है आज की रचना ... हर कदम पर सतर्क रहना ही जीवन है ...
कुछ गहरे एहसास भी हैं इस रचना में ...

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

सुन्दर ! समय रहते संभलना चाहिए ! बाद में पछताने से क्या होगा !

vandan gupta said...

इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना

बेहद प्रभावशाली और प्रासंगिक रचना।

pratibha said...

कविता जी!
इससे पहले कि हर कोई
कतरा के चलने लगे
इतरा के न चलना
इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना
इससे पहले कि कोई
नफरत भरी निगाहों से देखे
प्यार में संभल कर चलना
...................हिन्दी काव्य क्षेत्र में आपकी यह क्रांतिकारी प्रयोगवादी बेजोड़ रचना प्रचलित दुरूहवाद से उभरकर आपकी एक अलग पहचान बनाने में सक्षम है ....
कुछ हटकर सर्व हितार्थ अनूठी रचनाएँ आपके ब्लॉग पर पढने को मिलती है, जो मन में एक गहरी पैठ बनाती चली जाती है..... आपकी हर रचना का इंतज़ार रहता है......
इस अनुपम प्रयोगवादी रचना के लिए बहुत बहुत आभार ....शुभकामना .........

vijay said...

इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना
...सटीक,प्रभावशाली प्रासंगिक प्रस्तुति

Unknown said...

इससे पहले कि कोई
आप, तुम से तू पर आता हुआ
दिल बहलाने की चीज़ समझ बैठे
संभल जाना
इससे पहले कि कोई
मीठी बातों में उलझा कर
गलत राह पर मजबूर करने लगे
समझ जाना...
जीवन से जुडी बेहद प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण .... इस रचना में कुछ गहरे एहसास भी हैं ....शुक्रिया

रंजना said...

बहुत ही सही कहा आपने....

कल्याणकारी बातें अति सुन्दर ढंग से समझा दी आपने...

बहुत ही सुन्दर रचना..

sheetal said...

Kavita ji
kya kahu main,itni sundar prerana daayak rachna,hame apni zindagi main in sabhi baato ka dhyaan rakhna hain.
itni khubsurat prastuti hum tak pahuchane ke liye aapka shukriya.

सम्वेदना के स्वर said...

कविता जी! सावधान करने का शुक्रिया!!जीवन का लगभग सारा ज्ञान समेट दिया आपने!!

सुज्ञ said...

वाह!!कविता जी,
सावधानियों का कव्यमय लक्षण-शास्त्र!!

क्या…खूब्।

निर्मला कपिला said...

इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
कविता बहुत सुन्दर सार्थक सन्देश देती रचना है। बधाई।

शूरवीर रावत said...

कविता जी, इस सुन्दर और प्रेरणादायक प्रस्तुति के लिए आभार.

Smart Indian said...

कविता, विचार, सलाह जो भी नाम दीजिये, है सार्थक!

Urmi said...

बहुत ख़ूबसूरत और लाजवाब रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बेहतरीन प्रस्तुती !

Anonymous said...

इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना
..कुछ हटकर अनूठी प्रेरणादायक प्रस्तुति के लिए आभार.

Anonymous said...
This comment has been removed by the author.
shailendra said...

घर में घुसकर
अपनों में फूट डालने लगे
भांप जाना
इससे पहले कि किसी की कोई
बात चुभने लगे
बातों पर अपनी ध्यान देना
....हर एक लफ्ज सन्देश से भरा है ..उस पर प्रस्तुतीकरण ..क्या गजब है

deepti sharma said...

mere pas shbad nhi hai kahne ko
bahut sunder
or blog m aane ko aabhar aapse anurodh h k yuhi margdarsan karte rahiye
dhanyvad

नया सवेरा said...

... behatreen rachanaa !!!

उपेन्द्र नाथ said...

इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना


kavita ji bahoot hi sunder sheekh ke sath sunder kavita.....

Dr Xitija Singh said...

बहुत खूब कविता जी ... वक़्त रहते संभल जाना बेहद ज़रूरी है ...

Unknown said...

इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना
इससे पहले कि कोई
नफरत भरी निगाहों से देखे
प्यार में संभल कर चलना

लाजवाब अनुपम कविता के लिए धन्यवाद .... आपका ब्लॉग पढ़ना एक नया अनुभव है.... विविधता से भरा आपके ब्लॉग की रचनाएँ, आलेख ब्लॉग्गिंग के उद्देश्य को साकार करती है .....बहुत बहुत आभार आपका...

Unknown said...

इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना
Kavita ji! behatreen abhivyakti laajawab andaanj mein... kya kahne!!
yun hi sundar rachnayen post karna...

Neeraj said...

आपकी सीख याद रखूँगा|

Unknown said...

इससे पहले कि कोई
घर में घुसकर
अपनों में फूट डालने लगे
भांप जाना
इससे पहले कि किसी की कोई
बात चुभने लगे
बातों पर अपनी ध्यान देना

जीवन सीख की नायाब प्रस्तुति ....
बेहतरीन रचना

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

घर में घुसकर
अपनों में फूट डालने लगे
भांप जाना
इससे पहले कि किसी की कोई
बात चुभने लगे

यथार्थ को प्रस्तुत करती कविता.

किसी तकनीकी कारण से आप का ब्लॉग मेरे कम्प्यूटर पर नहीं खुल रहा था.देर से आने के लिए क्षमा कीजियेगा और साथ ही शुक्रिया भी फेसबुक पर जुड़ने के लिए.

Unknown said...

इससे पहले कि हर कोई
कतरा के चलने लगे
इतरा के न चलना
इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना
इससे पहले कि कोई
नफरत भरी निगाहों से देखे
प्यार में संभल कर चलना

फेसबुक में आपका ब्लॉग लिंक देखा तो सोचा चलो ब्लॉग की सैर कर ली जाये .. यहाँ आकर स्तब्ध हूँ ... ..सच में आप अपने नाम की साकार प्रतिमूर्ति हो... बहुत अच्छी सीख वाली कविता पढ़ी ...हमेशा याद रखूँगा और ब्लॉग पर नयी रचना जरुर पढूंगा ......

संजय भास्‍कर said...

...कुछ गहरे एहसास भी हैं इस रचना में ...
मेरी मंजिल.......संजय भास्कर
नई पोस्ट पर आपका स्वागत है..........कविता जी
धन्यवाद

Er.Sunil Kumar Singh said...

I really lack words to appreciate and express myself truly. really wonderful and very inspiring and ethically awesome.
May you be blessed in all your missions!

Anonymous said...

खलील जिब्रान पर आपकी टिप्पणी का तहे दिल से शुक्रिया....उम्मीद है आगे भी आप ऐसे ही हौसलाफजाई करते रहेंगे|

बहुत सुन्दर कविता है आपकी इससे पहल की जिंदगी की शाम हो जाये की तर्ज़ पर...... बहुत खूब....... एक नसीहत देती पोस्ट ....शुभकामनाये|

POOJA... said...

बिल्कुल सही कहा आपने...
बहुत सी बातें मुझे कटाक्ष लगी, न जाने थी या नहीं... जैसे कतरा कर चलना इतराने की जगह... यूँही और ही हैं... आजकल हम दर कर हर काम करते हैं कि कहीं गलत न हो जाए..

Unknown said...

इससे पहले कि हर कोई
कतरा के चलने लगे
इतरा के न चलना
इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना

excellent creation....

शिक्षामित्र said...

मौलिक कविता है। हमारा वश स्वयं पर ही है। अपनी मर्यादा न भूलें और यथासंभव दूसरों की मर्यादा का भी ध्यान रखें,इससे अधिक न कुछ हो सकता है,न अपेक्षित है। बाक़ी बात प्रारब्ध पर।

ZEAL said...

.

सावधान करती हुई प्रेरणादायक प्रस्तुति के लिए आभार ।

.

BrijmohanShrivastava said...

बेहतरीन। शिक्षाप्रद बातें । खासतौर पर बच्चे बच्चियों के लिये । उन्हे भी जो सीधे साधे है

Unknown said...

इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना...

behtreen...

facebook mein friends request accept karne ke liya dhanyavaad...
bahut hi sundar hai aapka blog... bahut see kavityen padhi... man mein gahree utarti hain... yun hi likhti rahen yahi shubhkamna hai..

Kunwar Kusumesh said...

"कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना"

जीवन में संभलकर चलते हुए रहने का काव्यात्मक सुन्दर संकेत

रचना दीक्षित said...

हर एक बात खरी कितनी सीधी सच्ची खरी और बातें सही मार्ग दर्शन करती हुई बेहतरीन पोस्ट

Unknown said...

इससे पहले कि कोई
घर में घुसकर
अपनों में फूट डालने लगे
भांप जाना
इससे पहले कि किसी की कोई
बात चुभने लगे
बातों पर अपनी ध्यान देना

.....सावधान करती हुई प्रेरणादायक प्रस्तुति पढ़कर मन अभिभूत हो गया ,
बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आभार

Satish Saxena said...

पहली तीन लाइनें ही गज़ब हैं कविता जी !
बढ़िया चेतावनी दी है इस रचना में ...हकीकत में जो खतरे है उन्हें आगाह करने के लिए आभार !

ज़मीर said...

आपने बहुत ही सुन्दर रचना की तथा साथ ही शिक्षा भी दी. आभार

V.P. Singh Rajput said...

नमस्कार जी! बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...

***Punam*** said...

jindagi main ye ehtiyaat bartne chahiye.....
lekin hum aksar bhool jaate hain aur pachtate hai..
yaad rakhne wali hidaayten...
shukriya !!!

talent said...

jawab nahi aapka....