दूर-पास का लगाव-अलगाव - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

शनिवार, 1 जून 2013

दूर-पास का लगाव-अलगाव


कोई सेब अपने पेड़ से बहुत दूर नहीं गिरता है।

बछड़ा अपनी माँ से बहुत दूर नहीं रहता है।।


दूर का पानी पास की आग नहीं बुझा सकता  है।

मुँह मोड़ लेने पर पर्वत भी दिखाई नहीं देता है।।


दूर उड़ते हुए पंछी के पंख बहुत लुभावने होते हैं।

किसी सुंदरी के केश दूर से घने दिखाई देते हैं।।


दूर रहने वाले बंधु-बांधव भले जान पड़ते हैं।

दूर के ढोल सबको ही बड़े सुहावने लगते हैं।।


बाड़ के पार घास ज्यादा हरी दिखाई देती है।

अक्सर दूरी घिनौनेपन को छिपा लेती है।।


.....कविता रावत

37 टिप्‍पणियां:

  1. दूर का पानी पास की आग नहीं बुझा सकता है।
    मुँह मोड़ लेने पर पर्वत भी दिखाई नहीं देता है।।

    सशक्त पंक्तियां, जीवन-सूत्रों को अभिव्यक्त करती हुईं।

    जवाब देंहटाएं
  2. दूर के ढोल सबको ही बड़े सुहावने लगते हैं। सही कहा आपने बहुत पते की बात कविता रावत जी, आभार।

    जवाब देंहटाएं
  3. गहरी सीख देती पंक्तियाँ... आभार इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए

    जवाब देंहटाएं
  4. कोई सेब अपने पेड़ से बहुत दूर नहीं गिरता है।
    बछड़ा अपनी माँ से बहुत दूर नहीं रहता है।।
    ......................
    ना तो बछड़ा और नाही माँ रहती है एक दुसरे की बिना
    आपने तो दूर-पास के संबंधो को सुन्दर ताने -बाने से बुन दिया है.,......कुशल बुनकर हैं ............बधाई

    जवाब देंहटाएं
  5. सुन्दर ,भावपूर्ण ,सशक्त और नसीहत देती रचना

    जवाब देंहटाएं
  6. अनुपम, अद़भुद, अतुलनीय, अद्वितीय, निपुण, दक्ष, बढ़िया रचना
    हिन्‍दी तकनीकी क्षेत्र की रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारियॉ प्राप्‍त करने के लिये एक बार अवश्‍य पधारें
    टिप्‍पणी के रूप में मार्गदर्शन प्रदान करने के साथ साथ पर अनुसरण कर अनुग्रहित करें
    MY BIG GUIDE
    नई पोस्‍ट
    इन्‍टरनेट पर हिन्‍दी सर्च इंजन
    अपने ब्‍लाग के लिये सर्च इंजन बनाइये

    जवाब देंहटाएं
  7. बाड़ के पार घास ज्यादा हरी दिखाई देती है।

    हां क्रिकेट में ही देखो वहां भी खूब हरी भरी घास उग गयी है आजकल सबकी नज़र उसी घास पर जमी हुयी है .............................................बहुत सशक्त रचना

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत उम्दा,सशक्त भावपूर्ण पंक्तियाँ,,,

    Recent post: ओ प्यारी लली,

    जवाब देंहटाएं
  9. .बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.....

    जवाब देंहटाएं
  10. बाड़ के पार घास ज्यादा हरी दिखाई देती है।
    अक्सर दूरी घिनौनेपन को छिपा लेती है।।GAZAB CHHOTI PAR GAHRI SOCH ....

    जवाब देंहटाएं
  11. आसपास के सब आवश्यक तत्वों से हम सदा ही अधिक पाते हैं, वही सदा साथ निभाते हैं।

    जवाब देंहटाएं
  12. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (02-06-2013) के चर्चा मंच 1263 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

    जवाब देंहटाएं
  13. अक्सर दूरी घिनौनेपन को छिपा लेती है।।

    सच-मुच ठीक कहा

    जवाब देंहटाएं
  14. सुंदर जिंदगी की सार्थकता को लिए हुए सुंदर प्रस्तुति !!

    जवाब देंहटाएं
  15. पुरानी कहावत सच ही है कि दूर के ढोल सुहावने होतें हैं ..बहुत सुंदर |

    जवाब देंहटाएं
  16. दूर की हर चीज़ सुहानी ही लगती है हकीक़त तो नजदीकी के एहसास से ही पता लगती है....
    बहुत सुन्दर

    जवाब देंहटाएं

  17. दूर रहने वाले बंधु-बांधव भले जान पड़ते हैं।
    दूर के ढोल सबको ही बड़े सुहावने लगते हैं।।----

    बहुत सही और सार्थक बात
    वाह बहुत खूब
    बधाई


    आग्रह है पढें
    तपती गरमी जेठ मास में---
    http://jyoti-khare.blogspot.in

    जवाब देंहटाएं
  18. बहुत सुंदर
    अच्छी रचना
    क्या कहने


    नोट : आमतौर पर मैं अपने लेख पढ़ने के लिए आग्रह नहीं करता हूं, लेकिन आज इसलिए कर रहा हूं, ये बात आपको जाननी चाहिए। मेरे दूसरे ब्लाग TV स्टेशन पर देखिए । धोनी पर क्यों खामोश है मीडिया !
    लिंक: http://tvstationlive.blogspot.in/2013/06/blog-post.html?showComment=1370150129478#c4868065043474768765

    जवाब देंहटाएं
  19. दूरी हमेशा प्रयत्नशील बनाती है।

    जवाब देंहटाएं
  20. दूर रहने वाले बंधु-बांधव भले जान पड़ते हैं।
    दूर के ढोल सबको ही बड़े सुहावने लगते हैं।।..

    बिलकुल सच कहा है ... दूर से सब कुछ हरा हरा नज़र आता है ...
    हर छंद कड़क है ... अपनी बात स्पष्ट कहता है ...

    जवाब देंहटाएं
  21. एक वैज्ञानिक जब इसे सोचता है तो गुरुत्वाकर्षण का नियम बन जाता है जब इसे कवि सोचता है तो धरती को एक सुंदर कविता मिल जाती है।

    जवाब देंहटाएं
  22. बाड़ के पार घास ज्यादा हरी दिखाई देती है।
    अक्सर दूरी घिनौनेपन को छिपा लेती है।। --सच कहा है
    LATEST POSTअनुभूति : विविधा ३
    latest post बादल तु जल्दी आना रे (भाग २)

    जवाब देंहटाएं
  23. वाह .लाजवाब कविता. धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  24. jeevan ki vastvikta darshati ek achhi rachna

    shubhkamnayen

    जवाब देंहटाएं
  25. आपने लिखा....हमने पढ़ा
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए कल 08/06/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  26. आदरणीया कविता जी,
    आपकी रचना ने चमौली और उत्तराखंड के हादसे की याद दिला दी,
    पास रहकर दूर जाते अपनों को बचाने उतरे सेना के जवानों की
    जितनी भी प्रशंसा की जाए कम होगा ... जवानों को मेरा नमन ....

    जवाब देंहटाएं
  27. door ka paani paas ki pyas nahin bujha sakta .. kewal dilasa de sakta hai aur wo bhi jhoothaa

    जवाब देंहटाएं