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शुक्रवार, 11 दिसंबर 2009

गज़ल: "अपनेपन का साथ तो बस एक सपना भाता है"

दिसंबर 11, 2009 15
अक्सर मुझको तन्हाई का, हर एक लम्हा भाता है, अपनेपन का साथ तो बस एक, सुंदर सपना भाता है। पास मेरे तो केवल अश्कों की ही ये जागीर बची, वक्त-ब...
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