पचास साठ के पार मगर दिल बचपन में खोया है,
भूले-बिसरे दिनों को याद करने का दिन आया है!
हाँ, भूले-बिसरे दिनों को याद करने का दिन आया है...
बस्ता उठाकर चलना, वो होमवर्क से डरना,
दोस्तों के साथ मिलकर वो शैतानी करना।
एक बार फिर बचपन की यादों में मन रमाया है,
भूले-बिसरे दिनों को याद करने का दिन आया है!
बालों में सफेदी है, मगर चेहरे पे नूर है,
दिल में छाया आज वही स्कूल का सुरूर है।
आओ बचपन की उन यादों को गले लगाएँ,
आज फिर से उन दिनों को ज़रा दोहराएँ।
कह दो ज़माने से कोई यादों का पिटारा लाया है,
भूले-बिसरे दिनों को याद करने का दिन आया है!
हर साल वो पुराना स्कूल का दिन याद आए,
पुरानी एल्बम खुले और किस्से सुनाए जाएँ।
आज तेरी बात, कल मेरी कहानी की आए बारी,
यादों की इस महफ़िल में सबकी हो हिस्सेदारी।
कौन भूला कौन याद रहा, क्या मिला क्या पाया है,
भूले-बिसरे दिनों को याद करने का दिन आया है!
एक छत तले गपशप चले, जहाँ सब दोस्त पास हों,
जहाँ स्कूल की बेंच और टिफिन के एहसास हों।
कोई मास्टर जी की फिर नक़ल उतारे प्यार से,
कोई छुपकर टिफिन खाए मुस्कुराए इकरार से।
वही दिन कोई फिर से आज मुस्कुरा के लाया है,
भूले-बिसरे दिनों को याद करने का दिन आया है!
न कोई फ़्लैट की फ़िक्र, न ऑफ़िस का डर,
यादों के सहारे लौट चलें सफ़र-दर-सफ़र।
कल जो बचपन था, वो एक प्यारी कहानी होगी,
ख़ुशी की एक शाम उन दोस्तों के नाम होगी।
बचपन से कुछ पल फिर कोई लेकर आया है,
भूले-बिसरे दिनों को याद करने का दिन आया है!,
किसी की आँखों में बचपन की चमक अभी है,
किसी की हँसी में स्कूल की खनक अभी है।
कुछ कहेंगे कि उम्र बहुत हो गई, मगर ये गफलत है,
पर हमारे दिल ने कहा—ये खबर बिल्कुल गलत है!
दिल की धड़कन देखो स्कूल वाला तूफ़ान लाया है,
भूले-बिसरे दिनों को याद करने का दिन आया है!
आओ दोस्तों, पुरानी यादों को सिर पर उठाएँ,
स्कूल के उन दिनों को हँसकर फिर से जी आएँ।
हर पुरानी मुलाकात को त्योहार बनाएँ,
मिलकर वही पुराने किस्से सुनाएँ।
आकर देखो कौन स्कूल के वो किस्से सुनाने आया है...
पचास साठ के पार मगर दिल बचपन में खोया है,
भूले-बिसरे दिनों को याद करने का दिन आया है!
... कविता रावत

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें