भाद्र शुक्ल चतुर्थी विशेष: गणेश जी का सिद्ध मयूरेश भजन | Ganesh Chaturthi Bhajan - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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रविवार, 13 सितंबर 2026

भाद्र शुक्ल चतुर्थी विशेष: गणेश जी का सिद्ध मयूरेश भजन | Ganesh Chaturthi Bhajan


जय गणेश जय जय जगवंदन, 
गिरिजा-सुत बाल गजानन।
भाद्र शुक्ल की तृतीया-चतुर्थी, 
प्रकट भए हर-गिरिजा नंदन॥
जय गणेश जय जय जगवंदन...

त्रेतायुग में सिंधु दैत्य ने, तीनों लोक कँपाए।
बंदी किए देव-गण सारे, धर्म-कर्म मिटाए॥
गंडकी तीर जपे गणपति को, गुरु-उपदेश सुजान।
प्रकट भए प्रभु सिंह-सवारी, हरने भक्तों के मान॥
जय गणेश जय जय जगवंदन...

बोले अष्ट-सिद्धि संग स्वामी, "त्यागो मन का त्रास।
सिंधु-दैत्य के वध की खातिर, लूँगा गिरिजा-गृह वास॥
सतयुग में सिंहारूढ़ प्रभु, त्रेता मयूरेश कहाऊँ।
द्वापर में गजानन बनकर, कलि में धूम्रकेतु कहलाऊँ॥"
जय गणेश जय जय जगवंदन...

शिव से एकाक्षर मंत्र पाकर, मातु सती ध्यान धरा।
पावन पर्वत पर बारह बरसों, कठिन तपस्या मात करा॥
निराहार निश्चल समाधि में, ध्याया श्रीगणेश का रूप।
प्रसन्न हुए तब ज्ञान-सिंधु प्रभु, त्रिभुवन-पति चिदानंद-भूप॥
जय गणेश जय जय जगवंदन...

भाद्र शुक्ल चतुर्थी मध्याह्न, प्रकट हुए श्री गणनाथ।
कोटि सूर्य सम तेज अलौकिक, सोहे बाल-शशि माथ॥
छह भुजाओं में शस्त्र सुशोभित, सुंदर कोमल रूप अनूप।
मोहित हुईं मातु पारवती, लखि मयूरेश स्वरूप॥
जय गणेश जय जय जगवंदन...

मातु पयोधर पान कराया, शिव ने नाम रखा 'गुणेश'।
ऋषि-मुनि आए चरण पखारन, मिटे सकल जग क्लेश॥
जो यह मयूरेश-कथा गाए, भाव-भक्ति मन लावे।
सकल संकट मिटें जीवन के, अंत परम पद पावे॥
जय गणेश जय जय जगवंदन...

॥ बोलिए श्री बाल मयूरेश भगवान की जय ॥
॥ उमा-महेश्वर सुत श्री गणेश की जय ॥

... कविता रावत 

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