बगीचे में मटकती 'नाचण' चिड़िया! | White-browed Fantail Bird In Garden - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

बगीचे में मटकती 'नाचण' चिड़िया! | White-browed Fantail Bird In Garden

नाचण रानी थिरक थिरक,
नाचे देखो फुदक फुदक

आँगन में आई एक नन्ही जान
पंखों का पंखा है इसकी पहचान
मिट्टी के ईंटों पर करती ये सैर
रुकते नहीं इसके चंचल से पैर
भूरी सी पीठ और सफेद हैं भौहें
हर हरकत कोई जादू जगाएं
हवा में उड़ते ही कीड़ों को खाती
अपनी ही मस्ती में गाना सुनाती
नाचण रानी थिरक थिरक,
नाचे देखो फुदक फुदक।
ऊपर लाए जैसा पंखा,
मन जीता है उसका डंका
कीड़े मकोड़े चट कर जाती,
सबको अपना दोस्त बनाती
पत्तों के पीछे वो जा के छुपे,
फिर एक झटके में सामने दिखे
इंसानो से इसको डर था ना कोई,
मस्ती की धुन में है जैसे वो खोई
सफेद वो पट्टी है आँखों के पास,
लगती है सूरत ये सबसे ही ख़ास
छोटा सा जिस्म और बड़ा सा कमाल,
इसकी अदा पे हम सब हैं निहाल
उड़ गई लेकर वो अपनी कहानी,
फिर आना तू नाचण रानी

... कविता रावत 

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