निर्विघ्न करना सदा मेरे सब काज हे विघ्नराज गणराज - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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रविवार, 31 अगस्त 2025

निर्विघ्न करना सदा मेरे सब काज हे विघ्नराज गणराज


तुमको भजते त्रिलोक के नाथ, तुम नाथों के भी हो नाथ
निर्विघ्न करना सदा मेरे सब काज हे विघ्नराज गणराज
निर्विघ्न करना सदा मेरे सब काज
त्रिपुरासुर जीतने शिव ने, बलि को छल से बाँधने विष्णु ने, जगत्‌ रचना रचने ब्रह्मा ने, जग धारण करने शेषनाग ने, महिषासुर संहार हेतु पार्वती ने, सिद्धि पाने सनकादि ऋषियों ने,
सकल जग जीतने कामदेव ने, तेरा ध्यान किया विघ्नराज
तुमको भजते त्रिलोक के नाथ, तुम नाथों के भी हो नाथ
निर्विघ्न करना सदा मेरे सब काज हे विघ्नराज गणराज
निर्विघ्न करना सदा मेरे सब काज

तुम विष्टरूप तमनाशक दिनेश, विघ्नरूप धारी दग्ध अग्नि, विघ्नरूप सर्पकुल दर्पनाशक गरुड, विघ्नरूप गज मार सिंह,
विघ्नरूप तुंग गिरि प्रभेद वज्र, विघ्नररूप महासमुद्र वडवानल
विघ्नरूप मेघ-दल भंजक प्रचण्ड वायु सदृश गणेश जी
दूर करना हमारे दुःख संताप, देना हरदम हमारा साथ
तुमको भजते त्रिलोक के नाथ, तुम नाथों के भी हो नाथ
निर्विघ्न करना सदा मेरे सब काज हे विघ्नराज गणराज
निर्विघ्न करना सदा मेरे सब काज

तुम नाटे मोटे तन वाले, गजराज सम मुख उदर वाले
अथाह करुणा रूप जलराशि सम तरंगित नेत्र वाले
पार्वती मुख सूर्य रूप बन कमल सम प्रकाशित करने वाले
विघ्नरूप तम नाश करने वाले,भक्तों को फल देने वाले
हे कामना पूर्णकर्ता सिद्धि दाता, विनायक गजानन महाराज
निर्विघ्न करना सदा मेरे सब काज हे विघ्नराज गणराज
निर्विघ्न करना सदा मेरे सब काज

तुमको भजते त्रिलोक के नाथ, तुम नाथों के भी हो नाथ
निर्विघ्न करना सदा मेरे सब काज हे विघ्नराज गणराज
निर्विघ्न करना सदा मेरे सब काज
... कविता रावत 


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