यादों की डगर और अधूरे गीत
कविता रावत
दिसंबर 06, 2009
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हमने संजोए थे कुछ शब्द, कुछ अनकहे गीत, सिर्फ तुम्हें सुनाने को, तुम्हें रिझाने को। सोचा था जीवन के किसी मोड़ पर जब मिलेंगे, तो जी भर कर बात...
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