गीत: बासंती मौसम है आया - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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बुधवार, 21 जनवरी 2026

गीत: बासंती मौसम है आया

जन-जन का मन है हरषाया,
बासंती मौसम है आया।
कण-कण धरती का मुस्काया,
बासंती मौसम है आया।

कली-कली पर भौरों ने,
मधुरिम संगीत सुनाया।
नई कोपलों कलियों ने,
है मोहक रूप लुटाया।
फसलों ने अपना रंग जमाया,
बासंती मौसम है आया।

बागों में ले अंगड़ाई,
है बोराई अमराई।
पीली-पीली सरसों ने,
क्या छटा खूब छिटकाई।
मन मगन-मगन मुस्काया,
बासंती मौसम है आया।

टेसू पलास का रंग जमा,
वन बीहड़ लिये जवानी।
हर डाल-डाल पर पात खिले,
कहते नई कहानी।
मस्ती ले फागुन आया,
बासंती मौसम है आया।

खेतों में गेहूँ की बालें,
गमकी-गमकी सीना ताने।
वरदान बना सबको बसंत,
सुख लुटा रहा है मनमाने।
हर जीवन में छाई उमंग,
बासंती मौसम है आया।

हर्ष और उल्लास लिये,
है झूम रही डाली-डाली।
सब ओर छटा है मतवाली,
बासंती मौसम है आया।
बासंती मौसम है आया...

गीत रचना- महेश सक्सेना
शिक्षाविद, बाल साहित्यकार,
बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र,
भोपाल 

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