श्री बद्रीनारायण स्तुति : पाप विनाशक और कष्ट निवारक वंदना - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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रविवार, 8 फ़रवरी 2026

श्री बद्रीनारायण स्तुति : पाप विनाशक और कष्ट निवारक वंदना


शीतल मंद सुगंध पवन जहाँ, अलकनंदा की धार।
स्वर्ण मुकुट सम मंदिर चमके, जय बद्री सरकार॥
विश्वम्भर हे रक्षक स्वामी, नमन करूँ कर जोड़।
चरणों में तेरे देव विराजें, नाता तुमसे जोड़॥

शेषनाग नित नाम उचारें, शिव धरते हैं ध्यान।
ब्रह्मा वेदों से हैं गाते, प्रभु की महिमा गान॥
इन्द्र, कुबेर और सूर्य चंद्रमा, धूप-दीप बन आएँ।
सिद्ध मुनीश्वर जय-जयकारें, चरणों में शीश नवाएँ॥

गौरी, गणपत, शारद, नारद, जपते तेरा नाम।
योग-मग्न हे नाथ निरंजन, सुख के पावन धाम॥
यक्ष-किन्नर नृत्य रचाते, गन्धर्व करते गान।
महालक्ष्मी चँवर डुलातीं, महिमा बड़ी महान॥

हिम शिखरों के मध्य विराजे, पावन कैलाश समान।
धर्मराज ने स्तुति कीनी, पाया अभय वरदान॥
जो भी गाए यह शुभ स्तुति, कटे पाप का जाल।
पाए पुण्य करोड़ों तीरथ, जय बद्री विशाल॥

पाप विनाशक, कष्ट निवारक, श्री बद्री भगवान।
कल्याण करो हे जगत नियंता, दो भक्ति का दान॥
॥ जय श्री बद्री विशाल ॥

... कविता रावत 

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