होली के गीत गाओ री! - KAVITA RAWAT
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Friday, March 22, 2013

होली के गीत गाओ री!

सखि! घर आयो कान्हा मेरे, खुशी से होली मनाओ री।
झूमती हूँ खुशी के मारे, तुम संग-संग मेरे झूमो री।।

उछलती कूदती मचलती, कभी खुशी से झूम उठती,
भूलकर अपना बिच्छोह, पल-पल प्रिय गले लगती।
कभी  प्रिय गले लगती, कभी खुशी के आसूं बहाती,
कभी झूम-झूम, घूम-घूम कर गली-गली घूम आती।।

गली-गली जाकर कहती, तुम संग मेरे झूमो री।
सखि! घर आयो कान्हा मेरे,खूब रंगोली सजाओ री।।

गए जब प्रियतम दूर मुझसे  नित बैचेन रहती थी,
प्रिय मिलन की बेला को, नित आतुर रहती थी।
अब सम्मुख कान्हा मेरे, नजरें उनसे चुराती हूँ,
जताकर प्रेम  उन्हीं से, गीत सुमंगल गाती हूँ।

गा रही हूँ खूब खुशी के मारे, तुम संग मेरे गाओ री।
सखि! घर आयो कान्हा मेरे, खुशी के रंग बरसाओ री।।

आया था बसंत जब, डाली-डाली हरियाली थी,
आकर कोयल आंगन में तब, गीत सुमंगल गाती थी।
फूल खिलते बहारों में, सबके ही मन लुभाती थी,
प्रिय बिनु यह सब तनिक दिल को न भाती थी।।

आया बसंत लौट के, फूलों के रंग में मुझे डुबाओ री।
सखि! घर आयो कान्हा मेरे, खुशी के फाग सुनाओ री।।

घिरकर भादो में काली घटायें, मन विकल कर गई थी,
गरज-गरज कर बरसते बादल, दिल झकझौर करती थी।
निरख दृश्य ऐसे उनकी यादों में खोई-खोई रहती थी,
लेकर आयेंगे होली के रंग, बैचेन दिल को समझाती थी।

लेकर आए वे होली के रंग, तुम भी  मेरे संग रंगो री।
सखि! घर आयो कान्हा मेरे,  होली के गीत गाओ री।।

  होली की हार्दिक शुभकामनायें!
                   ....कविता रावत 





48 comments:

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

उम्दा होली गीत, आपको भी होली की हार्दिक शुभकामनायें!

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत ही सुंदर होली गीत ,,,

Recent post: रंगों के दोहे ,

Harihar (विकेश कुमार बडोला) said...

सुन्‍दर होली गीत।

कालीपद "प्रसाद" said...

बहुर सुन्दर मन-भावन गीत कविता जी -बधाई इस सुन्दर गीत के लिए
latest post भक्तों की अभिलाषा
latest postअनुभूति : सद्वुद्धि और सद्भावना का प्रसार

Shalini kaushik said...

आया था बसंत जब, डाली-डाली हरियाली थी,
आकर कोयल आंगन में तब, गीत सुमंगल गाती थी।
फूल खिलते बहारों में, सबके ही मन लुभाती थी,
पिय बिनु यह सब तनिक दिल को न भाती थी।।
very nice kavita ji .happy holi to you.

Unknown said...

कविता जी बहुत ही सुन्दर गीत प्रकृति और जीवन को
झंकृत करता हुआ ,होलो की अग्रिम सुभकामनाएं

Anonymous said...

होली के गीत गाओ और रंगों में रंग जाओ

मंगल मिलन की हार्दिक शुभकामनाएं

Sushil Bakliwal said...

होली की हार्दिक मंगलकामनाएँ...

Unknown said...

very nice song

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुंदर होली गीत .... होली की शुभकामनायें

Dr.NISHA MAHARANA said...

bahut sundar geet kavita jee....happy holi...

Gyan Darpan said...

बहुत शानदार और उम्दा !
होली की अग्रिम शुभकामनाएँ स्वीकारें !

जब गीदड़ का लाइसेंस अनपढ़ कुत्तों के आगे काम ना आया

vijay said...

होली के अवसर पर ब्रज की होली के रंग में रंगी होली गीत बहुत सुन्दर लगी ..........................
आपको भी होली की शुभकामनायें!!!!!!!!!!!!

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत सुन्दर पंक्तियाँ..होली की शुभकामनायें..

अरुन अनन्त said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (24-03-2013) के चर्चा मंच 1193 पर भी होगी. सूचनार्थ

Ramakant Singh said...

होली आई होली आई
कान्हा के संग खेलें होली
ग्वाल बाल संग नाचे राधा
कृष्ण गोपियों की हंसी ठिठोली

आनन्द विक्रम त्रिपाठी said...

आया बसंत लौट के, फूलों के रंग में मुझे डुबाओ री।
सखि! घर आयो कान्हा मेरे, खुशी के फाग सुनाओ री।।
बहुत बढियां ,भावपूर्ण चित्रण |

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

वाह! बहुत ख़ूब! होली की हार्दिक शुभकामनाएं!

yashoda Agrawal said...

आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 27/03/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

दिगम्बर नासवा said...

गए जब प्रियतम दूर मुझसे नित बैचेन रहती थी,
प्रिय मिलन की बेला को, नित आतुर रहती थी।
अब सम्मुख कान्हा मेरे, नजरें उनसे चुराती हूँ,
जताकर प्रेम उन्हीं से, गीत सुमंगल गाती हूँ।

होली का मौसम ओर कान्हा की ठिठोली न हो, उसका प्रेम किसी न किसी रूप में न हो ... उसका जिक्र न हो तो होली का त्योहार कहां ... अनुपम भाव लिए मधुर गीत ...
आपको होली की बहुत बहुत शुभ-कामनाएं ...

Vaanbhatt said...

खुबसूरत होली को समर्पित रचना...शुभ होलिकोत्सव...आपको...सपरिवार...

virendra sharma said...

उत्कृष्ट सांगीतिक गीत फाग का भाषिक माधुरी स्वर और ताल लिए ब्रज की मिठास लिए .


बढ़िया रचना फाग पे .मुबारक फाग फाग की रीत ,फाग की प्रीत ,फाग के लठ्ठ फाग . की भंग ,राग और रंग .शुक्रिया ज़नाब की सौद्देश्य टिपण्णी का .

ताऊ रामपुरिया said...

होली की बहुत ही सुंदर रचना, बहुत शुभकामनाएं.

रामराम

Pratibha Verma said...

बहुत सुन्दर ...
पधारें " चाँद से करती हूँ बातें "

संजय भास्‍कर said...

बहुत ही सुन्दर गीत कविता जी
आपको होली की बहुत बहुत शुभ-कामनाएं ..

ओंकारनाथ मिश्र said...

सुन्दर होली गीत. होली की शुभकामनायें.

RAJ said...

बहुत सुन्दर प्यारा होली गीत..........
Happy HOLI!!!!!

Dr. Sanjay said...

वाह! बहुत सुन्दर होली गीत......... आपको होली की हार्दिक शुभकामनाएं!

Surya said...

बहुत उम्दा सुंदर रचना!!!!!!!!!!!!
होली की हार्दिक शुभकामनायें!

Anonymous said...

आया था बसंत जब, डाली-डाली हरियाली थी,
आकर कोयल आंगन में तब, गीत सुमंगल गाती थी।
फूल खिलते बहारों में, सबके ही मन लुभाती थी,
प्रिय बिनु यह सब तनिक दिल को न भाती थी।।

आया बसंत लौट के, फूलों के रंग में मुझे डुबाओ री।
सखि! घर आयो कान्हा मेरे, खुशी के फाग सुनाओ री।।
बहुत सुन्दर कविता जी!
..........................................................................
रंग भरी मस्ती और ब्रज की होली ...तिस पर होली में राधा और कान्हा का जिक्र न हो ऐसा कैसे हो सकता है
.....आपको होली की पुरे परिवार सहित अग्रिम शुभकामनायें

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

होली के गीत हो और श्याम के बिना पूरा हो जाए..पढ़कर आनंद आ गया .सादर

vijai Rajbali Mathur said...

होली मुबारक

अभी 'प्रहलाद' नहीं हुआ है अर्थात प्रजा का आह्लाद नहीं हुआ है.आह्लाद -खुशी -प्रसन्नता जनता को नसीब नहीं है.करों के भार से ,अपहरण -बलात्कार से,चोरी-डकैती ,लूट-मार से,जनता त्राही-त्राही कर रही है.आज फिर आवश्यकता है -'वराह अवतार' की .वराह=वर+अह =वर यानि अच्छा और अह यानी दिन .इस प्रकार वराह अवतार का मतलब है अच्छा दिन -समय आना.जब जनता जागरूक हो जाती है तो अच्छा समय (दिन) आता है और तभी 'प्रहलाद' का जन्म होता है अर्थात प्रजा का आह्लाद होता है =प्रजा की खुशी होती है.ऐसा होने पर ही हिरण्याक्ष तथा हिरण्य कश्यप का अंत हो जाता है अर्थात शोषण और उत्पीडन समाप्त हो जाता है.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ...सादर!
--
आपको रंगों के पावनपर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Naveen Mani Tripathi said...

घिरकर भादो में काली घटायें, मन विकल कर गई थी,
गरज-गरज कर बरसते बादल, दिल झकझौर करती थी।
निरख दृश्य ऐसे उनकी यादों में खोई-खोई रहती थी,
लेकर आयेंगे होली के रंग, बैचेन दिल को समझाती थी।
behad prabhavshali prastuti ke liye aabhar Kavita ji ,

Neeraj Neer said...

वाह! बहुत ही उत्कृष्ट, बहुत बधाई.
होली के अवसर पर लिखी मेरी रचनाओं पर भी आपका स्वागत है.
KAVYA SUDHA (काव्य सुधा): होली
KAVYA SUDHA (काव्य सुधा): होली नयनन की पिचकारी से

सुज्ञ said...

होली की हार्दिक शुभकामनायें!!!

प्रतिभा सक्सेना said...

मन को आह्लादित करती यह उमंग बनी रहे!

मेरा मन पंछी सा said...

बहुत ही सुन्दर रचना...
होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ...
:-)

ZEAL said...


होली की हार्दिक शुभकामनायें!!!

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर...होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Madan Mohan Saxena said...


बहुत खूब .सुन्दर प्रस्तुति. आपको होली की हार्दिक शुभ कामना .



ना शिकबा अब रहे कोई ,ना ही दुश्मनी पनपे गले अब मिल भी जाओं सब, कि आयी आज होली है प्रियतम क्या प्रिय क्या अब सभी रंगने को आतुर हैं हम भी बोले होली है तुम भी बोलो होली है .

Arvind Mishra said...

उमंग भरा होली गीत -मिलन के चटख रंग से सराबोर

Unknown said...

वाह क्या बात है! बहुत सुन्दर!

रचना दीक्षित said...

लेकर आए वे होली के रंग, तुम भी मेरे संग रंगो री।
सखि! घर आयो कान्हा मेरे, होली के गीत गाओ री।।

बहुत सुंदर गीत.
आपको भी होली की हार्दिक शुभकामनाये.

Anonymous said...

आया था बसंत जब, डाली-डाली हरियाली थी,
आकर कोयल आंगन में तब, गीत सुमंगल गाती थी।
फूल खिलते बहारों में, सबके ही मन लुभाती थी,
प्रिय बिनु यह सब तनिक दिल को न भाती थी।।
...............बहुत-बहुत सुन्दर गीत!!

The Mukhtiars said...

nice one

Saras said...

सुन्दर गीत ..!!!

आनन्द विक्रम त्रिपाठी said...

सुंदर |