​श्री अन्न (Millet) : भारतीय विरासत और आधुनिक सेहत का संगम - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपनी कविता, कहानी, गीत, गजल, लेख, यात्रा संस्मरण और संस्मरण द्वारा अपने विचारों व भावनाओं को अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का हार्दिक स्वागत है।

गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

​श्री अन्न (Millet) : भारतीय विरासत और आधुनिक सेहत का संगम



कभी 'गरीबों का अनाज' कहे जाने वाले ज्वार, बाजरा, रागी और कोदो-कुटकी आज अपनी पौष्टिकता के दम पर वैश्विक 'सुपरफूड' बनकर उभरे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इन्हें 'श्री अन्न' (मिलेट्स) की संज्ञा देना न केवल इनके सम्मान को बढ़ाता है, बल्कि हमारी प्राचीन विरासत को आधुनिक थाली से जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास भी है।

​एक समय था जब भारतीय ग्रामीण अंचलों में मोटे अनाज भोजन का मुख्य हिस्सा थे। बदलते दौर और हरित क्रांति के बाद गेहूं और चावल का वर्चस्व बढ़ा, जिससे ये पोषक अनाज हाशिए पर चले गए। लेकिन आज जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ रही हैं, तो दुनिया फिर से भारत के इन पारंपरिक खजानों की ओर देख रही है। देश भर में शहर-शहर सज रहे 'मिलेट मेले' इस बात के प्रमाण हैं कि अब 'श्री अन्न' खेत-खलिहानों से निकलकर शहरी गलियों और आधुनिक डाइनिंग टेबल तक पहुँच चुका है।

​श्री अन्न को 'सुपरफूड' कहना पूर्णतः तर्कसंगत है क्योंकि जहां एक ओर कोदो, रागी में कैल्शियम, बाजरे में आयरन और ज्वार में फाइबर की मात्रा प्रचुर होने से पोषक तत्वों का खजाना है, वहीं दूसरी ओर ये अनाज 'ग्लूटेन-मुक्त' और 'ग्लाइसेमिक इंडेक्स' कम होने से मधुमेह (Diabetes) और हृदय रोगों से लड़ने में सहायक हैं, जिससे बीमारियों से बचाव होता है।
​आज श्री अन्न का स्वरूप बदल रहा है। अब ये सिर्फ रोटी तक सीमित नहीं हैं; बल्कि विविध रूप में हमारे सामने प्रस्तुत हैं- कोदो की मिठाई बिस्कुट और खीर, रागी के बिस्किट और मिलेट पास्ता जैसे आधुनिक व्यंजन युवाओं को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
​भारत दुनिया में श्री अन्न का सबसे बड़ा उत्पादक है। इन फसलों को उगाने में कम पानी और उर्वरकों की आवश्यकता होती है, जिससे ये 'जलवायु अनुकूल' (Climate-smart) फसलें कहलाती हैं। मिलेट मेलों के माध्यम से जब सीधे उपभोक्ताओं और किसानों के बीच सेतु बनता है, तो इससे स्थानीय किसानों की आय बढ़ती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलती है।
​'श्री अन्न' को अपनाना केवल स्वाद का बदलाव नहीं, बल्कि एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण की दिशा में उठाया गया कदम है। यह हमारी विरासत के प्रति गर्व और आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर स्वास्थ्य का संकल्प है। जैसा कि देश के विभिन्न हिस्सों में लगने वाले मेलों का संदेश है—जब हम श्री अन्न अपनाते हैं, तो हम न केवल अपनी सेहत सुधारते हैं, बल्कि अपने किसानों का सम्मान और भारत की कृषि विरासत को भी जीवित रखते हैं।
​श्री अन्न अपनाएं, स्वस्थ भारत बनाएं! जय हिंद।
... कविता रावत 


2 टिप्‍पणियां:

गिरधारी खंकरियाल ने कहा…

कोदो की रोटी और नौण की गुंदकी। वाह!

Admin ने कहा…

आपने श्री अन्न की बात बिल्कुल सही उठाई। मैं खुद मानता हूँ कि ज्वार, बाजरा और रागी हमारी थाली में फिर से जगह deserve करते हैं। हम सालों तक इन्हें नजरअंदाज करते रहे, लेकिन अब लोग सेहत को लेकर जागरूक हो रहे हैं। मिलेट्स शरीर को ताकत देते हैं और शुगर जैसी बीमारियों को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। साथ ही किसान भी इन फसलों से फायदा उठाते हैं क्योंकि इन्हें कम पानी चाहिए।

क्या आपको यह रचना पसंद आई?

ऐसी ही और रचनाओं के लिए मुझसे जुड़ें: