शिखर की ओर नारी। International women's Day special song - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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रविवार, 8 मार्च 2026

शिखर की ओर नारी। International women's Day special song



कल तक जो थी बंदिशों में, आज वही हुंकार है,
रोजी-रोटी की डगर में, अब वो भी साझीदार है।
ना केवल वो 'गृह लक्ष्मी', ना केवल 'सहधर्मिणी',
खुद के दम पर लिख रही जो, अपनी नई कहानी है।

पैसे पर था हक पुरुष का, नारी बस आश्रित रही,
झिड़की, फटकार और यातना, चुपचाप वो सहती रही।
"पति पद प्रेमा" के आदर्श ने, पाँव उसके बांधे थे,
लक्ष्मण रेखा के भीतर ही, सारे सपने साधे थे।
धन की चाबी पास तो थी, पर तिजोरी दूर थी,
वो जगत की पालनी, पर फिर भी कितनी मजबूर थी।

महंगाई के दौर में अब, बजट जब लड़खड़ा गया,
पुरुष की एकाकी आय का, हर महल डगमगा गया।
अब ना ये कोई फैशन है, ना ही केवल स्वातन्त्र्य की ललक,
जीवन जीने की खातिर, उसने दिखाई नई झलक।
धुरी बनी मानवता की, वो मूल्यों का संवाहक है,
सृष्टि के इस पुण्य की, वो ही अब रक्षक-नायक है।

स्कूल हो या कॉलेज देखो, बेटियां ही आगे हैं,
मेहनत के उस आसमान में, सबसे ऊंचे धागे हैं।
भेद-भाव की दीवारें, गर गिर जाएं इस जीवन से,
छू लेगी वो हर ऊंचाई, अपने दृढ़ मन-तन से।
आने वाला युग कहेगा— "नारी का ये दौर है",
कल तक जो चुप चाप थी, अब उसकी गूँज चहुँ ओर है।

प्रसाद जी की श्रद्धा बनकर, पीयूष स्रोत बहाएगी,
विश्व दिवस के मंच पर, अपना परचम लहराएगी।
वो दिन दूर नहीं होगा, जब हम ये गाते जाएंगे,
जैसे मनाया महिला दिवस, वैसे ही पुरुष दिवस मनाएंगे।
... कविता रावत 


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