भजन: ​महावीर की अमृत वाणी । The Nectar-like Words of Mahavira - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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रविवार, 29 मार्च 2026

भजन: ​महावीर की अमृत वाणी । The Nectar-like Words of Mahavira



महावीर की वाणी अनमोल, जीवन की राह दिखाती है।
जिसने एक भी शिक्षा मानी, उसकी नैया पार लगाती है॥

क्रोध निगल जाता है प्रेम को, माया मित्रता खाती है।
लोभ गुणों का नाश करे, यह दुनिया आनी-जानी है॥
अपनी आत्मा को जो जीते, उसने जग को जीत लिया।
विषय-विकार और पाप-दोष का, जिसने है परित्याग किया॥
महावीर की वाणी अनमोल...

जैसे जल में कमल खिले, पर जल से लिप्त न होता है।
विषय-भोग से दूर रहे जो, वही परम पद पाता है॥
देह नाव है, जीव नाविक, भव-सागर गहरा भारी।
संयम से वे पार उतरते, छोड़ मोह की बीमारी॥
महावीर की वाणी अनमोल...

स्वजन, परिजन और ये वैभव, बस जीवन के साथी हैं।
प्राण-पखेरू उड़ते ही, कोई न संग में आती है॥
अहिंसा, संयम, तप में जिनका, चित्त सदा ही लीन रहे।
शीश झुकाते देव भी उनको, जो धर्म-मार्ग पर अडिग रहे॥
महावीर की वाणी अनमोल...

शत्रु न उतना अहित करे, जितना मन का मैल करे।
आत्मा ही सुख-दुख की कर्ता, खुद से खुद का मेल करे॥
तू अजर-अमर, तू शक्ति-पुंज, तू पूर्ण ज्योति स्वरूप है।
क्षणभंगुर है नश्वर काया, तू सत्य का ही रूप है॥
महावीर की वाणी अनमोल...

मंथन कर लो अंतर्मन का, क्या पाया क्या बाकी है।
ज्ञानी वही जो जीव मात्र की, करे न हिंसा रत्ती है॥
कण-कण में भगवान निहारो, महावीर की राह चलो।
अमर लोक को पा जाओगे, तुम भी अब महावीर बनो॥
महावीर की वाणी अनमोल...

... कविता रावत 

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