बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥
चैत्र शुक्ल की पावन तिथि, मघा नक्षत्र सुहाय।
अंजनी के उर उपजे कपि, सुर नर मुनि हरषाय॥
कोई कहे चैत्री पूनम, कोई आश्विन की रीत।
कल्प-भेद से मुनि जन गावें, प्रभु चरणों में प्रीत॥
दशरथ-हव्य अंश से प्रकटे, राम-बंधु कहलाये।
शाप-मुक्त कर सुर-वनिता को, निज महिमा दरसाये॥
जय हनुमान... जय हनुमान...
शिव के ग्यारहवें अवतारी, रुद्र देह तजि आये।
जानि राम सेवा अति सरस, प्रभु के सेवक भाये॥
महान रूप धरि असुर विनाशे, रिपु-सूदन कहलाये।
अतुलित बल-चातुर्य नीत से, बिगड़े काज बनाये॥
जय हनुमान... जय हनुमान...
भक्ति-शक्ति के दिव्य संगम, ज्ञान-गुणी अति धीर।
सेवा-भक्ति के अनुपम विग्रह, हरते सबकी पीर॥
स्वामी-भक्त, विनम्र, कृतज्ञ, निर्णय-क्षमता खान।
चरण-शरण जो आए आपकी, मिले उसे कल्यान॥
जय हनुमान... जय हनुमान...
अंजनी-सुत के गुण गाकर, पा लें कृपा अपार।
राम-दूत के सुमिरन से ही, बेड़ा होगा पार॥
॥ जय श्री राम - जय हनुमान ॥
... कविता रावत
हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें