अंजनीपुत्र मारुतिनंदन हनुमान जी शक्ति, भक्ति और सेवा के साक्षात् विग्रह हैं। उनके जन्म और स्वरूप के विषय में विभिन्न पुराणों और ग्रंथों में जो मत वर्णित हैं, उनका सारगर्भित विवेचन निम्नलिखित है:
१. जन्म तिथि एवं नक्षत्र: विभिन्न मतहनुमान जी के प्राकट्य को लेकर शास्त्रों में 'कल्पभेद' (विभिन्न कालचक्रों) के अनुसार दो मुख्य मान्यताएँ प्रचलित हैं:
चैत्र मास मत: कुछ विद्वानों और ग्रंथों के अनुसार, हनुमान जी का जन्म चैत्र शुक्ल एकादशी को मघा नक्षत्र में हुआ था। वहीं, एक बड़ा वर्ग चैत्र पूर्णिमा को उनका जन्मोत्सव मनाता है।
वायुपुराण का मत: वायुपुराण के एक श्लोक के अनुसार, हनुमान जी का जन्म आश्विन कृष्ण चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी) को स्वाति नक्षत्र, मेष लग्न और मंगलवार के दिन हुआ था।
२. साक्षात् शिव अवतारहनुमान जी को भगवान शिव का ग्यारहवाँ रुद्र अवतार माना जाता है। उनसे पूर्व के दस अवतार क्रमशः मन्यु, मनु, महिनस, शिव, ऋतध्वज, उग्ररेता, भव, काल, वामदेव और धृतव्रत हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने 'दोहावली' में स्पष्ट किया है कि भगवान शंकर ने राम-सेवा के रस का आनंद लेने के लिए ही अपनी 'रुद्र देह' का त्याग कर हनुमान का रूप धारण किया:
"जेहि सरीर रति राम सों, सोइ आदरहिं सुजान। रुद्र देह तजि नेह बस, संकर भे हनुमान।।"
'आनंद रामायण' में हनुमान जी के जन्म का संबंध राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ से जोड़ा गया है, जो उन्हें श्री राम का भ्रातृ-तुल्य सिद्ध करता है:
शाप और मुक्ति: सुर्वचना नामक अप्सरा ब्रह्मा जी के शाप से 'गृध्री' (गिद्धनी) बन गई थी।
हव्य का प्रवाह: जब राजा दशरथ ने यज्ञ का प्रसाद (हव्य) माता कैकेयी को दिया, तब वह गृध्री उसे छीनकर उड़ गई। ब्रह्मा के विधान के अनुसार, वह हव्य अंजना की गोद में जा गिरा।
प्राकट्य: देवी अंजना ने उस हव्य का सेवन किया, जिससे उनके गर्भ से परम बलशाली हनुमान जी का प्राकट्य हुआ। इस घटना के साथ ही वह अप्सरा भी शापमुक्त होकर पुनः देवलोक को प्राप्त हुई।
४. व्यक्तित्व के बहुआयामी गुण
हनुमान जी मात्र शारीरिक बल के प्रतीक नहीं हैं, अपितु वे मानवीय और दैवीय गुणों के दुर्लभ संगम हैं:
अतुलित बल और साहस: वे अपार शक्ति के स्वामी और शत्रुओं का नाश करने वाले 'रिपुसूदन' हैं।
निष्कर्ष: हनुमान जी का चरित्र हमें सिखाता है कि महानता केवल शक्ति में नहीं, बल्कि उस शक्ति के संयम और समर्पण में निहित है। उनका जीवन निस्वार्थ सेवा का सर्वोच्च आदर्श है।
अर्थात् ज्ञानी जन उसी शरीर का आदर करते हैं जिसका राम से प्रेम हो। इसी प्रेम के वशीभूत होकर शिव जी हनुमान बने।
३. जन्म की अलौकिक कथा (आनंद रामायण के अनुसार)'आनंद रामायण' में हनुमान जी के जन्म का संबंध राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ से जोड़ा गया है, जो उन्हें श्री राम का भ्रातृ-तुल्य सिद्ध करता है:
शाप और मुक्ति: सुर्वचना नामक अप्सरा ब्रह्मा जी के शाप से 'गृध्री' (गिद्धनी) बन गई थी।
हव्य का प्रवाह: जब राजा दशरथ ने यज्ञ का प्रसाद (हव्य) माता कैकेयी को दिया, तब वह गृध्री उसे छीनकर उड़ गई। ब्रह्मा के विधान के अनुसार, वह हव्य अंजना की गोद में जा गिरा।
प्राकट्य: देवी अंजना ने उस हव्य का सेवन किया, जिससे उनके गर्भ से परम बलशाली हनुमान जी का प्राकट्य हुआ। इस घटना के साथ ही वह अप्सरा भी शापमुक्त होकर पुनः देवलोक को प्राप्त हुई।
४. व्यक्तित्व के बहुआयामी गुण
हनुमान जी मात्र शारीरिक बल के प्रतीक नहीं हैं, अपितु वे मानवीय और दैवीय गुणों के दुर्लभ संगम हैं:
अतुलित बल और साहस: वे अपार शक्ति के स्वामी और शत्रुओं का नाश करने वाले 'रिपुसूदन' हैं।
विद्वता और नेतृत्व: वे वेदों के ज्ञाता, चतुर राजनीतिज्ञ और अद्भुत निर्णय क्षमता के धनी हैं।
भक्ति और समर्पण: उनमें सेवाभाव, विनम्रता और कृतज्ञता कूट-कूट कर भरी है।
निष्काम कर्मयोगी: हनुमान जी 'भक्ति और शक्ति' के बेजोड़ समन्वय हैं। उन्होंने अपनी समस्त शक्तियाँ भगवान राम की सेवा में अर्पित कर दीं, इसीलिए वे आज भी विश्व के सबसे पूजनीय देवताओं में अग्रणी हैं।निष्कर्ष: हनुमान जी का चरित्र हमें सिखाता है कि महानता केवल शक्ति में नहीं, बल्कि उस शक्ति के संयम और समर्पण में निहित है। उनका जीवन निस्वार्थ सेवा का सर्वोच्च आदर्श है।
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।।
महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन विराज सुवेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा।।
हाथ बज्र और ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै।।
शंकर सुवन केसरी नन्दन। तेज प्रताप महा जगबन्दन।।
विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्रजी के काज संवारे।।
लाय संजीवन लखन जियाए। श्री रघुबीर हरषि लाए।।
रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो यश गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मदि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिक्पाल जहां ते। कवि कोविद कहि सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राजपद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र विभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्त्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गए अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना।।
आपन तेज सम्हारो आपै। तीों लोक हांक ते कांपै।।
भूत पिचाश निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट ते हनुमान छुड़ावै। मन-कर्म-वचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काम सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु सन्त के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्वि नव निधि के दाता। अस वर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुःख बिसरावै।।
अंतकाल रघुबर पुर जाई। जहां जनम हरि भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गुसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो शत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महासुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।
दोहा- पवन तनय संकट हरण, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
इति श्री हनुमान चालीसा।
हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक मंगलकामनाएं!
... कविता रावत

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38 टिप्पणियां:
सुंदर भक्तिमय प्रस्तुति...जय हनुमान!!
सुन्दर लेखन
जय केसरी नंदन!!!
शानदार...........................
जय सियाराम
जय हनुमान!
अति सुन्दर रचना....
जय हनुमान की....
www.safarhainsuhana.blogspot.in
जय हनुमान!
बहुत सुंदर प्रस्तुति.
नई पोस्ट : मनुहार वाले दिन
मारुति नंदन नमो नमः
कष्ट भंजन नमो नमः
असुर निकंदन नमो नमः
श्रीरामदूतम नमो नमः
सुंदर प्रस्तुति...
जय हनुमान!
अच्छी प्रस्तुति .................
आपको भी हनुमान जयंती की हार्दिक मंगलकामनाएं!
हार्दिक मंगलकामनाएं....
जय हनुमान!!आपको भी हनुमान जयंती की हार्दिक मंगलकामनाएं!
सुन्दर पोस्ट !!
हनुमान जयंती की हार्दिक मंगलकामनाएं!!!
हनुमान जयन्ती की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल रविवार (05-04-2015) को "प्रकृति के रंग-मनुहार वाले दिन" { चर्चा - 1938 } पर भी होगी!
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सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
अतिसुन्दर भाव अंजलि हनू मान को .बधाई कविता बेटे जी .
सुंदर ।
जय बजरंगबली। शोध पूर्ण लेख।
अतुलित बस धामा ... बजरंग बली के बारे में बहुत शोध कर के लिक्खी गयी आपकी पोस्ट संजो के रखने वाली है ... यह नहीं दरअसल पिछली ३-४ पोस्ट बहुत ही अच्छी और जानकारी से भरी हुयी हैं ... हनुमान जयंती की हार्दिक बधाई ... जय हनुमान ...
भक्तिमय प्रस्तुति
हनुमान जी की महिमा मयी प्रस्तुति अनमोल है
आभार आदरणीया।
बजरंगबली की गाथा सुनकर मन धन्य हुआ।
जय बजरंगबली....सुन्दर पोस्ट
हनुमान जी पर सुंदर प्रस्तुति। जय हनुमान।
जय जय जय हनुमत बलबीरा
Jay hanuman veer...
Sharthak prastuti.
बहुत खूब
मंगलकामनाएं आपको !
आपकी भक्तिमय प्रस्तुति अच्छी लगी।
दीदी आपके ब्लॉग पर SiteMap होना चाहिए ताकि पाठकों को पूरे लेखों की सूची देखकर पढ़ने में सुविधा हो।
जय बजरंगबली
अग्रिम शुभ कामनाएँ
हनुमान जयन्ती की मंगलकामनाएं।
निश्चय प्रेम प्रतितहे विनय करें सन्मान ... तेहिके कारण सकल शुभ शुद्धि करें हनुमान ...
जय बजरंगबली की ...
padhkar mn pavitrta se paripurn ho gya, bahut khoob.....
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (19-04-2019) को "जगह-जगह मतदान" (चर्चा अंक-3310) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
अंजनी पुत्र हनुमानजी के बारे में महत्वपूर्ण एवं विस्तृत जानकारी ...बहुत ही लाजवाब...
ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 18/04/2019 की बुलेटिन, " विश्व धरोहर दिवस 2019 - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !
बहुत सारगर्भित और विस्तृत जानकारी... आभार
हनुमान के चरित्र के विविध आयामों को लिखा है आपने यहाँ ... कुछ चरित्र सच में हनुमान की तरह जीवित हैं लोक में जो सदा सदा रहेंगे ... हनुमान जयंती की हार्दिक बधाई ...
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