मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में आस्था और प्रकृति का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलता है, जो विज्ञान और आध्यात्म दोनों के लिए जिज्ञासा का विषय है। मंडीदीप से लगभग 7 किलोमीटर दूर, औबेदुल्लागंज रोड पर रेलवे लाइन के समीप स्थित है— 'जाखला धाम संकट मोचन हनुमान मंदिर'।
भद्राक्ष: एक विलुप्तप्राय और दुर्लभ वृक्षइस मंदिर के प्रांगण में स्थित 'भद्राक्ष' का वृक्ष श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। रुद्राक्ष के समान ही पूजनीय माना जाने वाला यह पेड़ अपनी विशेषताओं के कारण विश्वभर में दुर्लभ प्रजातियों की श्रेणी में आता है। मंदिर के पुजारी पंडित रोहन शर्मा के अनुसार, यह वृक्ष लगभग सौ वर्ष पुराना है और इसकी खूबियाँ किसी चमत्कार से कम नहीं हैं:
प्राकृतिक छत्र: इस पेड़ के पत्ते इतने घने होते हैं कि मूसलाधार बारिश में भी इसके नीचे खड़े व्यक्ति पर पानी की एक बूंद नहीं गिरती।अदृश्य पतझड़: ग्रीष्म ऋतु में इसके पत्ते जमीन पर गिरकर बिखरते नहीं, बल्कि शाखाओं पर ही धीरे-धीरे विलुप्त हो जाते हैं। गर्मी के चरम पर यह वृक्ष पत्तों से विहीन होकर केवल फूलों से लद जाता है।
प्रजनन का रहस्य: विज्ञान के लिए आज भी यह पहेली है कि इस पेड़ के बीजों से दूसरा पौधा नहीं उगता। वन विभाग और पुरातत्व विशेषज्ञों द्वारा 'गूंठी' और बीजों के माध्यम से इसे उगाने के तमाम प्रयास अब तक असफल रहे हैं
जहाँ रुद्राक्ष नेपाल और भारत दोनों स्थानों पर पाया जाता है, वहीं भद्राक्ष केवल भारत के कुछ अत्यंत दुर्लभ क्षेत्रों तक सीमित है। जानकारी के अभाव में इसका उपयोग मुख्य रूप से आभूषणों के निर्माण में किया जाता रहा है, किंतु आध्यात्मिक दृष्टि से इसका महत्व अद्वितीय है।आस्था का केंद्र: जाखला धाम
कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना वर्षों पूर्व रेलवे कर्मचारियों द्वारा की गई थी। समय के साथ हनुमान जी के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ता गया और आज यह स्थान न केवल स्थानीय ग्रामीणों के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश की श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। रेलवे लाइन और 'जाखला पुल' के पास स्थित यह धाम अपनी शांत आभा और 'भद्राक्ष' की शीतल छाया के लिए जाना जाता है।
...कविता रावत
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