तिल-तिल जीने वाला हर दिन मरता है - KAVITA RAWAT
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Monday, October 19, 2020

तिल-तिल जीने वाला हर दिन मरता है


शत्रु की मुस्कुराहट से मित्र की तनी हुई भौंहे अच्छी होती है
मूर्ख के साथ लड़ाई करने से उसकी चापलूसी भली होती है

किसी कानून से अधिक उसके उल्लंघनकर्ता मिलते हैं
ऊँचे पेड़ छायादार अधिक लेकिन फलदार कम रहते हैं

पत्थर खुद भोथरा हो फिर भी छुरी को तेज करता है
मरियल घोड़ा भी हट्टे-कट्टे बैल से तेज दौड़ सकता है

पोला बांस बहुत अधिक आवाज करता है
जो जिधर झुकता है वह उधर ही गिरता है

आरम्भ के साथ उसका अंत भी चलता है
तिल-तिल जीने वाला हर दिन मरता है

... कविता रावत 




12 comments:

शिवम् कुमार पाण्डेय said...

वाह, बहुत बढ़िया।

जितेन्द्र माथुर said...

बिल्कुल ठीक कहा आपने कविता जी ।

Kamini Sinha said...

सादर नमस्कार ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (13-10-2020 ) को "उस देवी की पूजा करें हम"(चर्चा अंक-3860) पर भी होगी,आप भी सादर आमंत्रित हैं।
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कामिनी सिन्हा

Jyoti Dehliwal said...

बहुत सटिक अभिव्यक्ति, कविता दी।

Meena Bhardwaj said...

हृदयस्पर्शी और सटीक सृजन ।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...

बहुत सुंदर, वाह

Anuradha chauhan said...

सुंदर और सटीक सृजन आदरणीया

Madhulika Patel said...

शत्रु की मुस्कुराहट से मित्र की तनी हुई भौंहे अच्छी होती है
मूर्ख के साथ लड़ाई करने से उसकी चापलूसी भली होती है,,,,,।बहुत बढ़िया एवं सटीक अभिव्यक्ति ।

ANIL DABRAL said...

बहुत सुंदर रचना..... व्यंग्य के क्या कहने....

कुमार गौरव अजीतेन्दु said...

sarthak post

Desi masala full masti said...

bhut achchhi jankariya btayi hai is post ke madhym se dhanywad aapka

Dr.Dayaram Aalok said...

"मूर्ख के साथ लड़ाई करने से उसकी चापलूसी भली होती है"-बहुत बढ़िया पंक्ति !