तिल-तिल जीने वाला हर दिन मरता है - KAVITA RAWAT
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Monday, October 19, 2020

तिल-तिल जीने वाला हर दिन मरता है


शत्रु की मुस्कुराहट से मित्र की तनी हुई भौंहे अच्छी होती है
मूर्ख के साथ लड़ाई करने से उसकी चापलूसी भली होती है

किसी कानून से अधिक उसके उल्लंघनकर्ता मिलते हैं
ऊँचे पेड़ छायादार अधिक लेकिन फलदार कम रहते हैं

पत्थर खुद भोथरा हो फिर भी छुरी को तेज करता है
मरियल घोड़ा भी हट्टे-कट्टे बैल से तेज दौड़ सकता है

पोला बांस बहुत अधिक आवाज करता है
जो जिधर झुकता है वह उधर ही गिरता है

आरम्भ के साथ उसका अंत भी चलता है
तिल-तिल जीने वाला हर दिन मरता है

... कविता रावत 




11 comments:

  1. बिल्कुल ठीक कहा आपने कविता जी ।

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  2. सादर नमस्कार ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (13-10-2020 ) को "उस देवी की पूजा करें हम"(चर्चा अंक-3860) पर भी होगी,आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    ---
    कामिनी सिन्हा

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  3. बहुत सटिक अभिव्यक्ति, कविता दी।

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  4. हृदयस्पर्शी और सटीक सृजन ।

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  5. सुंदर और सटीक सृजन आदरणीया

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  6. शत्रु की मुस्कुराहट से मित्र की तनी हुई भौंहे अच्छी होती है
    मूर्ख के साथ लड़ाई करने से उसकी चापलूसी भली होती है,,,,,।बहुत बढ़िया एवं सटीक अभिव्यक्ति ।

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  7. बहुत सुंदर रचना..... व्यंग्य के क्या कहने....

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