जागृति का सूरज । बाबा साहेब डॉ. भीमराव जयंती विशेष गीत | Dr. Ambedkar Jayanti Special - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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सोमवार, 13 अप्रैल 2026

जागृति का सूरज । बाबा साहेब डॉ. भीमराव जयंती विशेष गीत | Dr. Ambedkar Jayanti Special

अँधियारों को चीर कर, इक नया सवेरा लाया है,
अम्बावड़े का वो बालक, 'मार्तंड' बनके छाया है।
तिरस्कार की आग में जलकर, जो फौलाद बन निकला,
मिटाने छुआछूत की बेड़ियाँ, वो आज़ाद बन निकला।
ओ देश के राही! तू अपनी आत्मशक्ति को जगा ले,
भीम के आदर्शों को, तू आज हृदय से लगा ले।

गाड़ीवान ने उतारा था, अपवित्र समझकर राहों में,
पर ठाना था कि न्याय लिखेंगे, हम अपनी ही बाहों में।
अपमान के उन कड़वे घूँटों को, अमृत उसने बनाया,
कलम की ताकत से उसने, सारा जग थर्राया।
शिक्षा को शस्त्र बनाया, मसीहा वो कहलाया,
दलितों की सोई किस्मत को, उसने ही जगाया।

सात ऋषियों का काम अकेले, अपने कंधों पर धारा,
लिखा विधान राष्ट्र का ऐसा, जो बना विश्व का तारा।
जाति-पाति के बंध काट दिए, समता का पाठ पढ़ाया,
'जन गण' की गरिमा का ध्वज, अंबर तक लहराया।
राष्ट्र ऋणी है उस तपस्वी का, जिसने संविधान रचा,
मानवता के मंदिर में, बस एक ही नाम है बचा।

आओ मिलकर शपथ उठाएं, उनके पथ पर चलेंगे,
भेदभाव की दीवारों को, मिलकर हम अब ढहाएंगे।
मात्र जयंती मनाना ही, सच्ची श्रद्धांजलि नहीं होगी,
मानव-सेवा और राष्ट्र-प्रेम की, जब तक लौ न जगेगी।
भीम की ज्योति जलती रहे, हर मन के गलियारे में,
भारत का गौरव चमकता रहे, जग के हर सितारे में।

उठो! जागो! और पढ़ो! यही संदेश महान है,
आम्बेडकर ही इस भारत की, असली आन-बान-शान है।

... कविता रावत 

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