Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona: दु:ख
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शनिवार, 26 सितंबर 2009

अश्रु-स्तब्ध: एक त्रासदी

सितंबर 26, 2009 17
वह मौन खड़ी थी पास मेरे, पर दूर कहीं की वासी थी, ज्यों ठूँठ खड़ी हो तरु-शाखा, वह वैसी ही संन्यासी थी। क्षण भर को उठतीं पलकें उसकी, क्षण भर में...
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