वही तिनके जो हवा के एक झोंके से बिखर जाते हैं,
हुनरमंद मन की छुअन से टूटकर भी संवर जाते हैं।
कद्र चीज़ों की नहीं, उन्हें परखने वाली नज़र की होती है,
वरना महलों में भी लोग तन्हाइयों में रह जाते हैं।
कद्र चीज़ों की नहीं, उन्हें परखने वाली नज़र की होती है,
वरना महलों में भी लोग तन्हाइयों में रह जाते हैं।
... कविता रावत



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