छिपा रहता है माँ का संघर्ष - KAVITA RAWAT
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Friday, May 11, 2012

छिपा रहता है माँ का संघर्ष


माँ ताउम्र हरपल, हरदिन अपने घर परिवार के लिए दिन-रात एक कर अपना सर्वस्व निछावर कर पूर्ण समर्पित भाव से अपने घर परिवार, बच्चों को समाज में एक पहचान देकर स्वयं की पहचान घर चारदीवारी में छिपा कर रखती है। निरंतर संघर्ष कर उफ तक नहीं करती, ऐसी माँ का एक दिन कैसा होगा! दौड़ती-भागती जिंदगी, घर-दफ्तर की जिम्मेदारी में जूझती-खीझती, पिसती-खपती अपने आप जब भी मैं कभी मायूस होती हूँ तो मुझे अपनी माँ के संघर्ष भरे दिन याद आ जाते हैं। ६० साल बीत जाने के बाद भी संघर्षों ने मां का पल्‍लू नहीं छोड़ा है और उन्होंने भी कभी उनसे मुंह नहीं मोड़ा। मुझे उनसे संबल और हरदम जूझने की प्रेरणा मिलती है। 15-16 साल की कच्‍ची उम्र में शहर आकर घर परिवार की जिम्मेदारी अपने नाजुक कन्धों पर उठाना कोई खेल तो नहीं रही होगा!
पिताजी नौकरी करते थे और उनकी आय सीमित थी, ऐसे में आर्थिक तंगी से घर परिवार चलाते हुए माँ ने उनके साथ दृढ़तापूर्वक आगे बढ़कर हम सभी भाई-बहनों को लिखाने-पढ़ाने का भार अपने कन्धों उठाया घर की माली हालत को ठीक बनाये रखने के लिए गाय-बकरी पालकर पटरी बिठाई रखी।  माँ ने कभी स्कूल में दाखिला नहीं लिया। लेकिन जिंदगी के मुश्किल हालातों के थपेड़ों से वह पढ़ाई-लिखाई का मोल समझ गई थी। वह स्कूल की किताबों की लिखावट भले भी नहीं बांच सकी लेकिन दिनभर की दौड़ धूप के बाद देर रात तक चुपचाप हमारे पास बैठकर किताबों में लिखे अक्षरों के भावार्थ समझने में लगी रहती। माँ ने लड़के-लड़की का भेद न करते हुए हम दो बहनों और दो भाईयों की पढाई-लिखाई से लेकर स्कूल भेजने, ले जाने की सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ली। शहर में रहकर माँ ने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। कभी लाचारी नहीं दिखाई। कभी हालातों से समझौता नहीं किया। हमको नियमित स्कूल भेजना माँ को बहुत अच्छा लगता था। वह भले ही कभी हमारी अंकतालिका नहीं पढ़ पायी लेकिन वे हमारे चेहरे के भावों से सबकुछ आसानी से पढ़ लेती थी। माँ ने हमारा भविष्य निर्धारित किया और उसी का नतीजा है कि आज हम सब भाई-बहन पढ़-लिखकर अपने घर-परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों को बहुत हद तक ठीक ढंग से निभा पाने में समर्थ हो पा रहे हैं।
माँ का संघर्ष जारी है। भोपाल गैस त्रासदी के बाद हुए 5 ऑपरेशन झेलकर वह कैंसर से पिछले 7 साल से हिम्मत और दिलेरी से लड़ रही है। पिताजी को गए हुए 5साल हुए हैं, उन्हें भी कैंसर था। इसका पता अंतिम समय में चल पाया। माँ खुद कैंसर से जूझते हुए हमारे लाख मना करने पर भी नहीं रुकी। वह हॉस्पिटल में खुद पिताजी की देख रेख में डटी रही। माँ ने उनकी सेवा में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। हालांकि पिताजी ने कैंसर के आगे दो माह में ही हार मान ली। पर माँ बड़ी हिम्मत से इसका डटकर मुकाबला कर रही है। वह आज भी खुद घर परिवार की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटी है। मैं के साथ बीते पल अनमोल हैं। मेरा सौभाग्य है कि मेरी माँ हमेशा मेरे नजदीक ही रही है। शादी की बाद भी मैं उनके इतनी नजदीक हूँ कि मैं हर दिन उनके सामने होती हूँ। माँ घर से बाहर बहुत कम आ-जा पाती है। यह देख मुझे भी हरपल दुःख तो होता है। शायद यही नियति का खेल है।
माँ को देख आज हमें यही सीख मिलती है कि हालातों से मजबूर होकर जिंदगी से मुहं मोड़ना बुजदिली है, हालातों को अपने अनुकूल बनाना ही जीवन कौशल है। माँ अपने बच्चों के लिए कितना संघर्ष करती हैं, यह वह हर औरत समझती है जो माँ है।

   …कविता रावत

63 comments:

ऋता शेखर 'मधु' said...

सही कहा...माँ बच्चों के लिए बहुत संघर्ष करती है...बिना बताए बिना जताए..
आपकी माता जी को ईश्वर शक्ति दें और वे स्वास्थ्य लाभ करें.
मातृ दिवस की शुभकामनाएँ!!!

Uday said...

माँ को देख आज हमें यही सीख मिलती है कि हालातों से मजबूर होकर जिंदगी से मुहं मोड़ना बुजदिली है, हालातों को अपने अनुकूल बनाना ही जीवन कौशल है।
...माँ के संघर्ष का कोई मोल नहीं..
बहुत बढ़िया

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

माँ का संघर्ष आज के बच्चे देख ही नहीं पाते .... संवेदनशील पोस्ट

ANULATA RAJ NAIR said...

काश कि जैसे आपने अपनी माँ का संघर्ष और बलिदान समझा...वैसे हर बच्चा समझता और मान देता उन्हें.....
मेरी शुभकामनाये और प्रणाम माँ को.

सादर
अनु

अशोक सलूजा said...

माँ की ममता भरी छाँव का साया हमेशा आप सब भाई-बहनों
पर बना रहे!
शुभकामनाएँ!

रश्मि प्रभा... said...

माँ एक पर्वत सी होती है , जिसे खुद वह काटती रहती है और असंख्य रूप बनाती है

Ayodhya Prasad said...

...शायद इसीलिये माँ सबसे बढ़कर होती है |
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आत्मविश्वास की महत्ता ..

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

माँ की ममता का कोई पर्याय हो नहीं सकता
पूरी दुनिया में माँ तेरे जैसा कोई हो नही सकता
ये पंक्तियाँ मै अपनी माँ के नाम करता हूँ
माँ तेरे चरण छूकर सलाम करता हूँ
सभी माताओ को प्रणाम करता हूँ..

MY RECENT POST.....काव्यान्जलि ...: आज मुझे गाने दो,...

Amrita Tanmay said...

अनवरत संघर्ष का नाम माँ ही तो है..

Anju (Anu) Chaudhary said...

आपकी माँ को शत शत नमन ...

vijay said...

माँ खुद कैंसर से जूझते हुए हमारे लाख मना करने पर भी नहीं रुकी। वह हॉस्पिटल में खुद पिताजी की देख रेख में डटी रही। माँ ने उनकी सेवा में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी।

माँ जैसा दूसरा कोई हो नहीं सकता

माधव( Madhav) said...

आपकी माँ को शत शत नमन ...

Satish Saxena said...

सबसे पहला गीत सुनाया
मुझे सुलाते , अम्मा ने !
थपकी दे दे कर बहलाते
आंसू पोंछे , अम्मा ने !
सुनते सुनते निंदिया आई,आँचल से निकले थे गीत !
उन्हें आज तक भुला न पाया ,बड़े मधुर थे मेरे गीत !

आज तलक वह मद्धम स्वर
कुछ याद दिलाये कानों में
मीठी मीठी लोरी की धुन
आज भी आये, कानों में !
आज जब कभी नींद ना आये,कौन सुनाये मुझको गीत !
काश कहीं से मना के लायें , मेरी माँ को , मेरे गीत !

Satish Saxena said...

माँ को प्रणाम !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!
--
डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक"
टनकपुर रोड, खटीमा,
ऊधमसिंहनगर, उत्तराखंड, भारत - 262308.
Phone/Fax: 05943-250207,
Mobiles: 09456383898, 09808136060,
09368499921, 09997996437, 07417619828
Website - http://uchcharan.blogspot.com/

sushmaa kumarri said...

माँ तो सिर्फ माँ होती है...... .माँ तुझे सलाम...

Anonymous said...

माँ से दूर भागने वालों से बढ़कर अभागा शायद इस संसार में दूसरा हो ही नहीं सकता!!!!!!!
माँ को प्रणाम!

ZEAL said...

Hats off to all the wonderful and loving moms on earth.

Mamta said...

वह स्कूल की किताबों की लिखावट भले भी नहीं बांच सकी लेकिन दिनभर की दौड़ धूप के बाद देर रात तक चुपचाप हमारे पास बैठकर किताबों में लिखे अक्षरों के भावार्थ समझने में लगी रहती। माँ ने लड़के-लड़की का भेद न करते हुए हम दो बहनों और दो भाईयों की पढाई-लिखाई से लेकर स्कूल भेजने, ले जाने की सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ली। शहर में रहकर माँ ने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। कभी लाचारी नहीं दिखाई।____________
तभी तो वह माँ है अपनी जिम्मेदारी से कभी पीछे नहीं हटने वाली...
पूज्य माँ को चरण स्पर्श!!!!!!

मेरा मन पंछी सा said...

माँ शब्द में तो सम्पूर्ण श्रृष्टि समाहित है...
जिसमे प्रेम ,दया ,करुना,और संघर्ष और ना जाने कितने भाव है
बेहद कोमल भावपूर्ण रचना....

Meenakshi said...

बहुत भावुक हो चली....
माँ के संघर्ष की कोई सीमा नहीं..
माँ को मेरा प्रणाम कहना.

Ramakant Singh said...

जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गिरियशी
आप एक माँ है जिसे माँ की महत्ता समझाने की घृष्टता नहीं
करूँगा आपके स्मरण भाव को प्रणाम . खुबसूरत .

डॉ टी एस दराल said...

बहुत हिम्मत वाली हैं आपकी मां ।
उन्हें प्रणाम और शुभकामनायें ।

डॉ. मोनिका शर्मा said...

हृदयस्पर्शी पोस्ट ...माँ नमन

प्रवीण पाण्डेय said...

साँस चले, जीवन जीना है। आपकी माँ को नमन।

virendra sharma said...

कविता जी मेरी माँ भी ऐसी ही थी . एक बात .और कैंसर के मरीज़ के इलाज़ का हिस्सा होता है प्रेम और सहानुभूति हम उसे बचा तो नहीं सकते लेकिन उसकी मौत को आसान और गरिमा पूर्ण ज़रूर बना सकतें हैं .ये शब्द मेरे नहीं अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नोई दिल्ली की पैन क्लिनिक की एक प्रोफ़ेसर के हैं .जो अपने उन मर्जों का भी जन्म दिन मनातीं हैं जिनके बचने की कोई उम्मीद ही नहीं है .

मनोज कुमार said...

मां से बढकर कोई नहीं इस जग में।

Smart Indian said...

जीवन के संघर्षों का बहादुरी से मुकाबला करके माँ ने एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। खुशी की बात है कि आप जैसे बच्चों ने उनके श्रम को सार्थक किया। शुभकामनायें!

Maheshwari kaneri said...

माँ तो माँ ही होती है.. माँ को नमन...कविता जी बहुत सुन्दर पोस्ट...

शूरवीर रावत said...

दुःख भरी दास्ताँ..... ईश्वर आपको दुखों से लड़ने का हौसला दे. यही कामना है.

शूरवीर रावत said...

इस लाइलाज बीमारी के कारण पिछले अगस्त में मेरी माँ चल बसी थी। इसलिए मै आपका दुःख समझ सकता हूँ।

दिगम्बर नासवा said...

माँ के संबल और साहस से ही घर परिवार चलता है और बना रहता है .... बच्चों से लेकर बड़ों तक सब माँ पर ही निर्भर रहते हैं किसी न किसी रूप में ... माँ के इस अतुलनीय सहस के आगे नतमस्तक हूँ ... मेरा प्रणाम है उन्हें ..

Anonymous said...

बहुत हिम्मत वाली हैं मां!
बहुत सुन्दर पोस्ट.
माँ को प्रणाम!

Vaanbhatt said...

माँ के इस संघर्ष को शत-शत नमन...प्रेरणा का स्रोत है आपकी ये पोस्ट...

Raju Patel said...

आभार कविता- अत्यंत निजी किन्तु संवेदनशील लिखावट.आप ने मेरी माँ की याद ताज़ा कर दी.संघर्ष शब्द शायद माँ के साथ अनिवार्य रूप से जुडा हुआ है...आप की माँ को प्रणाम.

Anonymous said...

माँ के संघर्ष को आजकल के बच्चे कहाँ समझ पाते हैं ....
माँ के संघर्ष के संवेदनशील प्रस्तुतीकरण
मातृ दिवस की शुभकामना!

धम्मू said...

६० साल बीत जाने के बाद भी संघर्षों ने मां का पल्‍लू नहीं छोड़ा है और उन्होंने भी कभी उनसे मुंह नहीं मोड़ा। मुझे उनसे संबल और हरदम जूझने की प्रेरणा मिलती है।
.....
तभी तो वह माँ है...
माँ की मेरा भी सादर प्रणाम!

Narendra Mourya said...

मां के बारे में तो जितना लिखो कम है। मां होती ही ऐसी हैं। शब्द कम पड़ जाते हैं। भावनाओं का वेग गूंगा बना देता है। मैं फिर गहरे दुख से भर गया जब मैंने आपके पिता का कैंसर से जाना और मां का कैंसर से जूझना पढ़ा। मैंने भी अपने माता-पिता को इसी नामुराद बीमारी से खत्म होते देखा है। उसके बाद परिवार और दोस्तों में कई लोगों को इसी बीमारी ने छीन लिया। लेकिन जिंदगी संघर्ष करती है। जूझना ही मानव का मूल स्वभाव है। सो हम सब जूझ ही रहे हैं। कौन कितनी अच्छी तरह से जूझ पाता है बस इसी पर खेल टिका है। अपनी अम्मां के अंतिम दिनों में उनके सिरहाने बैठकर मैंने कुछ गजलें लिखी थी। उन दिनों की यह गजल हम सबकी मांओं के संघर्ष के नाम

अम्मां मेरे ख्वाबों को थपकिया दे दे
बचपन की फिर अल्हड़ कहानियां दे दे

तमाम उम्र न घबराये कभी मेहनत से
हमारे बाजुओं में इतनी शक्तियां दे दे

मैं भी चाहता हूं आज गुटरगूं करना
मुझे भी कोई परिंदों की बोलियां दे दे

कहीं न हार थक के रास्ते में रुक जाऊं
मुझे तू अपने तजुर्बों की पोथियां दे दे

बच्चे चाहते हैं फूल की तरह खिलना
इनके हाथ में कुछ हरी पत्तियां दे दे

mukti said...

अक्सर माँ से सम्बंधित कुछ भी पढ़कर आँखों में आँसू आ जाते हैं. पर आपकी माँ के बारे में पढ़कर मन उत्साह से भर गया. माँ को प्रणाम!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

सम्वेदनशील और मार्मिक, माँ को नमन

रचना दीक्षित said...

अत्यंत संवेदनशील आलेख. माँ का निरवरत संघर्ष ही बच्चों के कल्याण की सीढ़ी बनता है.

आप की माँ को प्रणाम.

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

माँ ने जिन पर कर दिया, जीवन को आहूत
कितनी माँ के भाग में , आये श्रवण सपूत
आये श्रवण सपूत , भरे क्यों वृद्धाश्रम हैं
एक दिवस माँ को अर्पित क्या यही धरम है
माँ से ज्यादा क्या दे डाला है दुनियाँ ने
इसी दिवस के लिये तुझे क्या पाला माँ ने ?

Rahul Singh said...

ममत्‍व से भरपूर संघर्ष.

Arvind Mishra said...

अनुकरणीय जिजीविषा ..उन्हें प्रणाम और आपको स्नेहभिवादन!!

ZEAL said...

bahut sundar...

Dr.R.Ramkumar said...

माँ ताउम्र हरपल, हरदिन अपने घर परिवार के लिए दिन-रात एक कर अपना सर्वस्व निछावर कर पूर्ण समर्पित भाव से अपने घर परिवार, बच्चों को समाज में एक पहचान देकर स्वयं की पहचान घर चारदीवारी में छुपा कर रखती है। निरंतर संघर्ष कर उफ तक नहीं करती, ऐसी माँ का एक दिन कैसा होगा!

हमारे ‘दिनों’ में जियेगी मां...हमारे सारे दिन मां के दिन होंगे। ‘मातृ जयंती’ शुभ हो।

Vijay said...

माँ घर से बाहर बहुत कम आ-जा पाती है। यह देख मुझे भी हरपल दुःख तो होता है। शायद यही नियति का खेल है।
नियति के आगे किसी का बस नहीं ..
माँ के संघर्ष को प्रणाम!

Noopur said...

Bohot sundar post....bilkul meri ma se milta julta...aur duniya ki har ma se....
hatts off to her,,for whatever she had given to me.... :)

Abhay said...

माँ ने कभी स्कूल में दाखिला नहीं लिया। लेकिन जिंदगी के मुश्किल हालातों के थपेड़ों से वह पढ़ाई-लिखाई का मोल समझ गई थी।
हालातों से जो सबक सिखाता है वह संघर्ष से पीछे नहीं हटता!!
माँ का संघर्ष बड़ा प्रेरणादाई है
माँ को सलाम!!!

सदा said...

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

कल 16/05/2012 को आपके ब्‍लॉग की प्रथम पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.

आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


... '' मातृ भाषा हमें सबसे प्यारी होती है '' ...

प्रेम सरोवर said...

हर किसी की मां अपने आप में बहुत ही प्यारी होती है । आपका यह पोस्ट बार-बार पढ़ने का मन करता है । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

Pratik Maheshwari said...

माँ से बढ़कर दुनिया में कोई चीज़ नहीं है.. खुद भगवान भी माँ को अपने से बड़ा मानते हैं..
आप खुशनसीब हैं कि आप आज भी अपनी माँ के करीब हैं.. मेरे ख्याल से ऐसे लोगों को यह पोस्ट पढनी चाहिए जिन्होंने अपनी सुख की खातिर अपने माँ-बाप को त्याग दिया...
मेरी आशा है कि आप भी इसी जिंदादिली कि साथ जीवन बिताएं!

Maheshwari kaneri said...

अत्यंत संवेदनशील आलेख...माँ को प्रणाम.

मनोज कुमार said...

मां का सघर्ष बच्चे को जीवन जीने और संघर्ष में सदा आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देते रहते।

गिरधारी खंकरियाल said...

मां के संघर्ष और धैर्य को सादर नमन

हरकीरत ' हीर' said...

माता जी को प्रणाम .....!!

Dr.NISHA MAHARANA said...

maa ki har bat sikh deti hai....

Kailash Sharma said...

माँ तो सिर्फ़ माँ होती है और उसके प्यार और त्याग की कोई सीमा नहीं होती...माँ की शक्ति और प्रेम को नमन !

निर्मला कपिला said...

माँ जैसा कोई नही ।शायद दु निया ह्गी माँ के दम पर है। अपकी माँ जी को शुभकामनायें।

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

माँ तो माँ होती है,,,,
माँ के संघर्ष के संवेदनशीलता का सुंदर प्रस्तुतीकरण और मातृ दिवस की शुभकामनाऐ,,,,,,,,,

MY RECENT POST,,,,काव्यान्जलि ...: बेटी,,,,,
MY RECENT POST,,,,फुहार....: बदनसीबी,.....

Mamta Bajpai said...

सच कहा आपने माँ जैसा तो कोई नहीं

Priyarajan said...

I read your post interesting and informative. I am doing research on bloggers who use effectively blog for disseminate information.My Thesis titled as "Study on Blogging Pattern Of Selected Bloggers(Indians)".I glad if u wish to participate in my research.Please contact me through mail. Thank you.

http://priyarajan-naga.blogspot.in/2012/06/study-on-blogging-pattern-of-selected.html

bhuneshwari malot said...

true, maa to maa h maa ka pyar anmol h.
जब भी किष्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
माॅ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है।
माता-पिता के जाने के बाद भी उनकी दुआओं का सिलसिला समाप्त नहीं होता है,
यह तो फिक्सड डिपोजिट की तरह है जिसका ब्याज जीवन भर मिलता ही रहता है।