थकान दूर करती है योग निन्द्रा - KAVITA RAWAT
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Wednesday, November 26, 2014

थकान दूर करती है योग निन्द्रा

निद्रा हमारे जीवन का एक बहुत आवश्यक कार्य है। निद्रा से हमारे शरीर तथा मन की थकावट दूर होती है, जिससे हम नये सिरे से कार्य करने के लिए फिर से सक्षम बन जाते हैं। एक दिन भी ठीक से नींद न आने से हमारे शरीर तथा मन की जो दशा होती है, उसका अनुभव सभी को है। इसी आधार पर निद्रा का महत्व समझा जा सकता है; लेकिन बहुत थोड़े लोग सोने की सही कला जानते हैं। सोने की जो लाभकारी कला है उसका जानना प्रत्येक व्यक्ति के लिए जरूरी है। योग निद्रा से थोड़े समय में ही शरीर तथा मन को अधिक आराम पहुँचता है। प्रायः लोग अपने दिनभर के अनुभवों पर सोच-विचार करते-करते सो जाते हैं। आज के समय में जीवन अत्यधिक संघर्षपूर्ण, तनावयुक्त तथा अनेक उलझनों से परिपूर्ण रहता है। तनाव, उलझन तथा चिन्ता के विचारों को लेकर उसमें डूब जाने से नींद देर से आती है। नींद में भी यही विचार स्वप्न के रूप में प्रकट होकर परेशान करते रहते हैं, जिससे अधिक देर तक सोने के बाद भी शरीर तथा मन को सही आराम नहीं मिल पाता और थकावट और सुस्ती का अनुभव होता है। अनेक लोग आज अनिद्रा रोग से ग्रस्त पाये जाते हैं। कुछ तो नींद की गोली खाये बिना सो ही नहीं सकते। योग निद्रा की यौगिक विधि से सोने का अभ्यास करने से बहुत शीघ्र नींद आती है। थोड़ी नींद में भी अधिक आराम का अनुभव होता है। सोकर उठने पर सुस्ती के बदले चुस्ती तथा फुर्ती का अनुभव होता है। योगनिद्रा को ही आगे चलकर अभ्यास द्वारा समाधि में भी बदला जा सकता है, जो यौगिक-साधनाओं का चरम लक्ष्य होता है।
योग निद्रा की अनेक विधियों में से कुछ निम्नानुसार प्रस्तुत हैं-
पहली विधि- बिस्तर पर चित्त होकर आराम के साथ लेट जाइये। बाजू को शरीर से कुछ अलग फैला लीजिये। हथेलियाँ ऊपर की ओर रहें। सिर तकिये पर रहे, लेकिन तकिया बहुत ऊँचा न हो। तन्दुपरांत नीचे बतलाये क्रम से शरीर के एक-एक अंग का मानसिक रूप से नाम बोलते हुए उन्हें शिथिल करते जाइये। शिथिल करने के लिए उन्हें बन्द आँखों से देखते चलिये तथा अपनी भावना करिये कि वह अंग शिथिल हो रहा है। सबसे पहले दाहिने हाथ का अंगूठा, दूसरी अंगुली, तीसरी अंगुली,  चौथी अंगुली, पांचवी अंगुली फिर दाहिनी हथेली, फिर कलाई, कोहुनी, कंधा, बगल, बाजू, कमर, नितम्ब का दाहिना भाग, जांघ, घुटना, पिंडली, टखना, एड़ी, तलुवा। फिर दाहिने पैर का अंगूठा, दूसरी अंगुली, तीसरी अंगुली, चौथी अंगुली, पाँचवी अंगुली। यही क्रम बांयी तरफ अपनायें। फिर दोनों भौंहों के बीच की जगह, दाहिनी भौंह, बांयीं भौंह, दाहिनी पलक, बांयी पलक, दाहिनी पुतली, बांयीं पुतली, दायां गाल, बाँयां गाल, दाहिना कान, बाँयां कान, नाक, ऊपर के ओंठ, नीचे के ओंठ, ठुड्डी, गर्दन, पूरी पीठ, छाती और पेट।  इतना हो जाने के बाद दाहिना हाथ, पूरा दाहिना पैर, पूरा बाँयां हाथ, पूरा बाँयां पैर, पूरी धड़, मस्तक, फिर पूरा शरीर।  अन्त में अपने पूरे शरीर को सिर से पैर तक शरीर से अलग देखिए- कहाँ हैं? क्या पहने हैं? कपड़ों का क्या रंग हैं? इत्यादि।
यह योगनिद्रा का एक चक्र हुआ। बहुत सम्भव है कि इतना करने से पहले ही नींद आ जाए तो कोई हानि नहीं। यदि इस समय तक नींद न आये तो फिर से अभ्यास का दूसरा चक्र नींद आने तक दुहराते जाएंँ। ध्यान रहे मन इधर-उधर न भटके। ऐसा होने पर मन को फिर एकाग्र कर वापस क्रिया में लगायें। कुछ दिन के अभ्यास के बाद अंगों का क्रम याद होने पर यह सरल व स्वाभाविक बन जाएगा।
यह अभ्यास दिन में भी किया जा सकता है। कठिन श्रम के बीच कुछ मिनट का भी समय मिलने  पर इसे कुर्सी में बैठे-बैठे भी किया जा सकता है। समय के अनुसार क्रिया अपने अनुकूल की जा सकती है।
दूसरी विधि-  बिस्तर पर चित्त लेटकर एक ही बार में पूरे शरीर को शिथिल कीजिए। ऐसा अनुभव करें कि शरीर बिस्तर पर पड़ा हुआ है और हम उससे एकदम अलग हैं। यह भी अनुभव करें कि हम अपने शरीर को दूर से देख रहे हैं, जो सोया हुआ है। 5 मिनट के लिए शरीर को एकदम ढीला तथा शिथिल करने के बाद 1, 2, 3, 4, 5 इस प्रकार सांस द्वारा लगातार गिनती करते जाएँ। अगर हमारा स्वास्थ्य ठीक है तो 100 की गिनती करते-करते नींद आ जाएगी।
तीसरी विधि-  शिथिलीकरण की एक और विधि यह है कि गिनती गिनने के बदले, दोनों भौंहों के बीच के स्थान में ’ऊँ’ या ‘सोऽहं’ का मानसिक जाप तब तक जारी रखें जब तक नींद न आ जाय। दोनों भौहों के बीच ध्यान केन्द्रित कर मानसिक जाप करने से बहुत शीघ्र गहरी नींद आती है।
चौथी विधि-  थोड़ी देर उपर्युक्त विधि द्वारा शरीर का शिथिलीकरण करने के बाद श्वास पर ध्यान ले जाकर मानसिक रूप से श्वासों को देखने का अभ्यास करें। थोड़े समय ऐसा करने के बाद इस विधि से श्वासों में ’ऊँ’ या ‘सोऽहं’ का जाप करते जायें। इस प्रकार सोते समय जाप का अभ्यास करने से मन एकाग्र होता है और बहुत ही शीघ्र नींद आ जाती है।
          योग निद्रा केवल नींद ही नहीं संकल्प शक्ति प्रयोग का भी साधन है। ऐसी माना जाता है कि योग निद्रा का अभ्यास शुरू करने से पहले मन ही मन पूरे आत्मविश्वास के साथ कोई भी शुभ संकल्प 5 बार और फिर समाप्ति से पहले 20 बार दुहराने से लिये गये संकल्प अवश्य ही पूर्ण होते हैं। शुभ संकल्प छोटे-छोटे वाक्यों में इस प्रकार हो सकते हैं- मैं प्रत्येक दिन सबेरे उठकर योग साधना करूँगा या मैं प्रातःकाल चार बजे अवश्य उठ जाऊँगा। मैं जो सोचूँगा वैसा कर सकूँगा। अपनी संकल्प शक्ति से मैं अपने आप को नीरोग कर लूँगा। मैं गुस्सा नहीं करूँगा। मैं बीड़ी-सिगरेट, शराब पीना एकदम छोड़ दूँगा। मैं किसी से लड़ाई नहीं करूँगा आदि-आदि। 

28 comments:

RAJ said...


योगनिद्रा के लिए मन का एकाग्र होना आवश्यक है लेकिन यही सबसे बड़ी समस्या है हम लोगों के साथ की मन इधर से उधर भटकता फिरता है ....
काम काज की व्यस्तता में योगनिद्रा की चौथी विधि ऊँ’ या ‘सोऽहं’ बड़े काम की है .....

ओंकारनाथ मिश्र said...

बहुत ही उपयोगी जानकारी दी है आपने. धन्यवाद.

Unknown said...

योग निन्द्रा के बारे में लाभकारी बड़ी जानकारी ...

Meenakshi said...

उपयोगी जानकारी शेयर करने के लिए धन्यवाद!!!

nayee dunia said...

बहुत सुंदर....लाभकारी जानकारी ...धन्यवाद.

Mamta said...

आज की भागदौड़ नींद में खलल बन जाती है यह सच है कि नींद की गोली खाकर सोने बहुतायत में है ... कई लोगों की तो नींद की गोली गटकने के बाद भी रात भर आसमान की ओर टकटकी लगी रहती है ...करवटे बदलते बीतती है ....ऐसे लोगों को जरूर योगनिद्रा का सहारा लेना चाहिए ताकि बिना दवा शरीर को नुक्सान भी न हो और काम भी बन जाए .....

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत सुंदर....उपयोगी लाभकारी जानकारी ...

Arogya Bharti said...

बहुत सुन्दर उपयोगी पोस्ट ...

Unknown said...

बहुत उपयोगी व लाभकारी जानकारी .......

दिलबागसिंह विर्क said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 27-11-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1810 में दिया गया है
आभार

Harihar (विकेश कुमार बडोला) said...

बहुत बढ़िया।

Arun sathi said...

साधू साधू

प्रतिभा सक्सेना said...

बहुत उपयोगी जानकारी -आभार !

मनोज कुमार said...

यह तो बहुत काम की चीज़ है। अपनाने की कोशिश करता हूं।

Surya said...

बड़े काम की जानकारी!!

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना शनिवार 29 नवम्बर 2014 को लिंक की जाएगी........... http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

महेन्‍द्र वर्मा said...

उपयोगी जानकारी।
अवश्य प्रयोग करूंगा।

गिरधारी खंकरियाल said...

सरल और आवश्यक जानकारी।

Smart Indian said...

शुभ संकल्प, मन की शांति, निद्रा, योगनिद्रा सभी ज़रूरी है।

सुशील कुमार जोशी said...

सार्थक पोस्ट ।

Vaanbhatt said...

सुन्दर प्रस्तुति...

kuldeep thakur said...

सुन्दर प्रस्तुति...
हमेशा की तरह उत्तम जानकारी।

Kailash Sharma said...

बहुत उपयोगी जानकारी....

अभिषेक शुक्ल said...

उपयोगी जानकारी आभार।

दिगम्बर नासवा said...

योग निद्रा होना और उसके लिए सतत प्रयार करने की विधि भी विस्तार से लिखी है आपने ... सतत प्रयास से नींद की इस समस्या से पार पाया जा सकता है ऐसा मानना है मेरा भी ... आपका आभार इस विधि को विस्तार से लिखने का ... प्रयास करके देखने में कोई हर्ज नहीं है ...

Unknown said...

Very useful information about Yoga Nidra......thnx a lot KAVITA JI

Himkar Shyam said...

सुंदर, उपयोगी और स्वास्थ्यवर्धक

Dr Hashmi said...

Thanks for sharing your post. General weakness and fatigue have turned out to be a major problem these days. You can try herbal supplement to get over it.Visit http://www.hashmidawakhana.org/low-energy-weakness-and-fatigue.html