नियति का क्रूर प्रहार और हमारी मानवीय संवेदनशीलता: एक मार्मिक अपील - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपनी कविता, कहानी, गीत, गजल, लेख, यात्रा संस्मरण और संस्मरण द्वारा अपने विचारों व भावनाओं को अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का हार्दिक स्वागत है।

गुरुवार, 5 जुलाई 2018

नियति का क्रूर प्रहार और हमारी मानवीय संवेदनशीलता: एक मार्मिक अपील

"सदा न फूले तोरई, सदा न सावन होय,
सदा न जीवन थिर रहे, सदा न जीवै कोय।"

सृष्टि का यह शाश्वत नियम है कि यहाँ न तो सदा सावन रहता है, न सदैव ऋतुएँ अनुकूल रहती हैं और न ही यह मानव जीवन स्थिर है। मृत्यु अटल है, किंतु जब यह असमय और अत्यंत क्रूर रूप में आती है, तो पीछे छोड़ जाती है एक असहनीय शून्यता और दर्द।
1 जुलाई 2018 (रविवार) को उत्तराखंड के भौन-धुमाकोट मोटर मार्ग पर हुई भयानक सड़क दुर्घटना ने न केवल देवभूमि को, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस हृदयविदारक हादसे ने तीन मासूम भाई-बहनों—14 वर्षीया सपना, 11 वर्षीया साक्षी और उनके 11 वर्षीय भाई—के सिर से माता-पिता (स्व. सुखदेव जी एवं स्व. बबली देवी) का साया हमेशा के लिए छीन लिया। कुछ ही समय पहले इन बच्चों ने अपने दादा-दादी को खोया था और अब नियति के इस क्रूर क्रंदन ने इन्हें पूरी तरह बेसहारा कर दिया।

असमय काल का ग्रास और बच्चों का भविष्य
दुर्घटनाएँ न तो मनुष्य की उपयोगिता देखती हैं, न समय-कुसमय और न ही किसी के उत्साह को। जीवन की तमाम खुशियाँ और तैयारियाँ मात्र एक झटके में समाप्त हो जाती हैं। जब भी ऐसी घटनाओं का स्मरण होता है, मन गहरी व्यथा से भर उठता है। अतीत के ऐसे ही जख्म (जैसे 13 जून 2010 को एक टाटा सूमो हादसे में गहरी खाई में गिरने से ९ लोगों की अकाल मृत्यु) आज भी समाज के सीने में ताजा हैं।
भले ही आज निकट संबंधी और रिश्तेदार इन बच्चों को ढाँढस बँधा रहे हों, परंतु हम सब जानते हैं कि माता-पिता का स्थान और उनका निश्छल संरक्षण कोई और नहीं ले सकता। आज इन मासूमों के सामने न केवल परवरिश का, बल्कि अपने भविष्य को सँवारने का एक विकट संकट खड़ा है।
मानवता की लौ: हमारी ज़िम्मेदारी
ईश्वर की इस रहस्यमयी और क्रूर लीला के आगे मनुष्य विवश हो सकता है, लेकिन मनुष्य को ईश्वर ने 'संवेदना' और 'विवेक' का अमूल्य उपहार दिया है, जो उसे समस्त प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ बनाता है। मानवीय संवेदना की लौ हर दिल में जलती है, बस आवश्यकता है उसे इस घड़ी में जागृत करने की।
इन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण और उन्हें जीवन जीने का संबल देने के लिए एक छोटी सी मानवीय पहल की गई है। आपसे सविनय अनुरोध है कि अत्यंत संवेदनशील होकर इन मासूमों की सहायता के लिए आगे आएँ। आपका छोटा से छोटा सहयोग भी बूँद-बूँद से घड़ा भरने की कहावत को चरितार्थ कर सकता है। आज के इस डिजिटल युग में इंटरनेट बैंकिंग और विभिन्न ऐप्स के माध्यम से सहयोग करना अत्यंत सुलभ हो चुका है।
वर्तमान में ये बच्चे अपने मामा श्री अरुण भदोला के संरक्षण में हैं। यदि आप व्यक्तिगत रूप से संवेदना व्यक्त करना चाहते हैं या किसी प्रकार का समन्वय करना चाहते हैं, तो उनसे संपर्क कर सकते हैं:
संपर्क सूत्र (मामा): 8650536735
आर्थिक सहयोग हेतु बैंक खाते का विवरण
आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार सीधे बच्चों के बैंक खातों में सहयोग राशि भेजकर उनके भविष्य की नींव सुदृढ़ कर सकते हैं:
1. कु. सपना (कक्षा 9, ई.का. अन्द्रोली)
माता-पिता: स्व. सुखदेव एवं स्व. बबली देवी
पता: ग्राम व पोस्ट- अन्द्रोली (नैनीडांडा), पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड
बैंक खाता संख्या: 35559265859
IFSC कोड: SBIN0004533
बैंक शाखा: SBI धुमाकोट (Dhumakot)

2. कु. साक्षी (कक्षा 7, ई.का. अन्द्रोली)
माता-पिता: स्व. सुखदेव एवं स्व. बबली देवी
पता: ग्राम व पोस्ट- अन्द्रोली (नैनीडांडा), पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड
बैंक खाता संख्या: 31863809098
IFSC कोड: SBIN0004533
बैंक शाखा: SBI धुमाकोट (Dhumakot)

विशेष आग्रह: समाज के सजग और संवेदनशील नागरिकों से विनम्र निवेदन है कि इस संदेश को अधिक से अधिक साझा करें ताकि इंसानियत की यह पुकार सही हाथों तक पहुँच सके और इन बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

17 टिप्‍पणियां:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहत ही दर्दनाक हादसा है ये ... कई बार प्राकृति विनाश की चरम स्थिति में पहुँच जाती है और इंसान के हात कुछ नहीं रह जाता ... मेरी संवेदनाएं हैं परिवार के साथ ... उमीद करता हूँ की इनकी मदद को दिल खोल के सभी साथ आयेंगे ... दुःख सभी का साझा होता है ...

Unknown ने कहा…

भगवान ऐसे दिन किसी को भी न दिखाए.................. इस गहरी दुःख की घड़ी में मेरे से जो भी बनेगा निश्चित रूप से सहयोग करूँगा और आशा करता हूँ आपके ब्लॉग तक पहुँचने वाले लोग भी सहयोग करने में पीछे नहीं रहेंगे ...............

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (06-07-2018) को "सोशल मीडिया में हमारी भूमिका" (चर्चा अंक-3023) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

दुख:द और दर्दनाक।

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार ६ जुलाई २०१८ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर = RAJA Kumarendra Singh Sengar ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन वयस्क होता बचपन और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

राजेंद्र गुप्ता Rajendra Gupta ने कहा…

बच्चों के संपर्क सूत्र देने के लिए धन्यवाद.

Jyoti Dehliwal ने कहा…

बहुत दर्दनाक हादसा। ईश्वर उन्हें दुखों से लड़ने की शक्ति दे।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

जो कुछ अपने हाथ में है उसका तो भरपूर उपयोग होना ही चाहिए

महेन्‍द्र वर्मा ने कहा…

बहुत ही दुखद और मार्मिक ।

शुभा ने कहा…

बहुत ही दुखद हादसा । संपर्क सूत्र देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद कविता जी ।

गिरधारी खंकरियाल ने कहा…

अत्यन्त दर्दनाक हादसा। ईश्वर मृतको की आत्मा को शान्ति एवं परिजनो शक्ति प्रदान करे।

'एकलव्य' ने कहा…

निमंत्रण विशेष : हम चाहते हैं आदरणीय रोली अभिलाषा जी को उनके प्रथम पुस्तक ''बदलते रिश्तों का समीकरण'' के प्रकाशन हेतु आपसभी लोकतंत्र संवाद मंच पर 'सोमवार' ०९ जुलाई २०१८ को अपने आगमन के साथ उन्हें प्रोत्साहन व स्नेह प्रदान करें। सादर 'एकलव्य' https://loktantrasanvad.blogspot.in/

Atoot bandhan ने कहा…

बहुत दर्दनाक हादसा ... दुखद

संजय भास्‍कर ने कहा…

अत्यन्त दर्दनाक हादसा ईश्वर मृतको को दुखों से लड़ने की शक्ति :)

संजय भास्‍कर ने कहा…

अत्यन्त दर्दनाक हादसा ईश्वर मृतको को दुखों से लड़ने की शक्ति

Preeti 'Agyaat' ने कहा…

बेहद दुखद

क्या आपको यह रचना पसंद आई?

ऐसी ही और रचनाओं के लिए मुझसे जुड़ें: