कविता संग्रह का उपहार - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Monday, February 28, 2022

कविता संग्रह का उपहार

आज सुबह जैसे ही मैं जागी तो मैंने देखा कि मेरे पतिदेव बड़ी उत्सुकता के साथ मेरे सामने खूबसूरत पैकिंग किया हुआ उपहार अपने हाथों में पकड़े हुए खड़े थे। वे चुपचाप खड़े-खड़े मुझे देखते हुए मंद-मंद मुस्कुराते जा रहे थे। मैं सोचने लगी कि आज तो न तो किसी रिश्तेदार या परिचित के यहाँ न तो किसी की शादी है, न कोई जन्मदिन है, न शादी की वर्षगाँठ है और न ही किसी का गृह प्रवेश आदि कार्यक्रम है, फिर पति महोदय किसके लिए यह उपहार लेकर आये होंगे। मैं सोचने लगी कि कहीं मैं कुछ भूल तो नहीं रही हूँ। मैंने बहुत याद किया लेकिन मुझे कुछ याद नहीं आया। अब मुझसे अधिक देर तक चुप नहीं रह गया और जैसे ही इस बारे में मैंने उनसे बात करनी चाही, उन्होंने मेरे हाथों में वह उपहार रख दिया और फिर कुछ शिकायती लहज़े में कहने लगे, "देख! तू कहती हैं न कि मैं तेरे लिए कोई उपहार नहीं लाता, तो ये लो जी आज मैं तेरे लिए ऐसा उपहार लाया हूँ, जिसे देख तू हमेशा याद रखेगी।" मैंने आश्चर्य से पूछा," सच कह रहे हो न? कहीं सुबह-सुबह कोई मजाक-वजाक तो नहीं कर रहे हो?" वे चहकते हुए बोले-" हाँ भई हाँ। पहले खोलकर देख तो लो, फिर कहना?" 

मैं उपहार की पैकिंग खोलते हुए सोच रही थी कि आज तक तो मैं ही इन्हें उपहार की बात छोड़ो, छोटी-छोटी चीजें भी लाकर देती हूँ। फिर आज ये ऐसा कौन सा उपहार देने चले मुझे, देखूँ तो और जैसे ही मैंने बाहर की पैकिंग उधेड़ी और अंदर झाँक कर देखा तो उसमें मुझे 'सचिन कम्प्यूटर डेल्हीवेरी' कुरियर कंपनी का एक पेड 'कैश मेमो'  जिस पर 'बुक' लिखा था, मिला तो मैं समझ गयी कि इसमें तो किताबें हैं। अब मेरी उत्सुकता बढ़ी कि देखूँ आखिर कौन सी किताबें हैं, मैंने जल्दी से फाड़कर किताबें बाहर निकाली तो उन पर 'यूँ ही अचानक कहीं कुछ नहीं घटता" और नीचे 'कविता रावत' लिखा देखा तो मैं अवाक रह गई। मेरे मुँह से निकला, 'अरे! ये तो मेरी कविताओं का संग्रह है! ये किसने छाप दिया!" यह सुनकर पतिदेव बोले,'बधाई हो। अब फिर कभी मत कहना कि मैं आज दिन तक तुम्हारे लिए कोई उपहार नहीं लाया।" मैं मुस्कुराते हुए 'हाँ, बाबा हाँ, नहीं कहूँगी '  कहते हुए किताब को उलट-पुलट कर देखने लगी और सोचती रही कि मैं खामख्वाह ही कभी-कभी इन्हें 'कभी कोई चीज नहीं लाते मेरे लिए' कह देती हूँ।  

मैं और मेरे जीवनसाथी "साथी हाथ बढ़ाना, साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थक जायेगा मिल कर बोझ उठाना" गीत की तरह हर कदम पर एक-दूसरे का साथ देते हैं, जिसका साक्ष्य मेरा यह 'यूँ ही अचानक कहीं कुछ नहीं घटता' काव्य संग्रह का प्रकाशन है। यदि वे  शब्द.इन टीम की सहायता प्रकोष्ठ से सम्पर्क कर  चुपके-चुपके मेरे इस 'कविता संग्रह' का प्रकाशन करवा कर मुझे उपहार स्वरुप भेंट न करते तो शायद इस कविता की कवितायेँ यूँ ही इधर-उधर बिखरी-बिखरी जाने कब तक मेरा मुँह ताकती रहती।

लोकोक्तियों पर आधारित मेरे पहले काव्य संग्रह 'लोक उक्ति में कविता' के उपरांत "यूँ ही अचानक कहीं कुछ नहीं घटता" मेरा दूसरा काव्य संग्रह है। इस संग्रह में मैंने बिना किसी भाषाई जादूगरी और उच्चकोटि की साहित्यिक कलाबाजी के स्थान पर दैनिक जीवन की आम बोलचाल की भाषा-शैली को प्राथमिकता दी है। संग्रह में कई विषय व विधा की कविताएं संग्रहीत हैं। संग्रह में एक ओर जहाँ आपको कुछ कविताओं में आज के सामाजिक, राजनैतिक परिदृष्य में अपने हक के लिए आवाज उठाने की गूँज सुनाई देगी, वहीँ दूसरी ओर कुछ विशिष्ट प्रतिमान लिए, कुछ प्रेम और कुछ देश-प्रेम की कविताओं के साथ कुछ पारिवारिक स्नेह बंधन के प्रतिरूप स्वरूप खास कविताएं भी.पढ़ने को मिलेंगी। संग्रह में एकरसता का आभास न हो इसलिए मैंने इसमें हर स्वाद की कविताओं को परोसा है। निष्कर्ष रूप से यह पुस्‍तक आम आदमी और अपने सुख-दुःख, संवेदनाओं व सामाजिक विषमताओं के बीच मन में उमड़ी गहन संवेदना और उससे दिल में उमड़ते-घुमड़ते खट्टे-मीठे अनुभवों व विचारों का संग्रह है, जिसे अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक नित्य नैमित कर्म समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस तक पहुंचाने का यह मेरा एक प्रयास है।

मेरा यह काव्य संग्रह साहित्य एवं पुस्तक प्रेमी पाठकों के लिए  शब्‍द.इन के प्लेटफॉर्म पर ऑनलान एडिशन  और  पेपरबैग  दोनों रूप में उपलब्ध है,  जिसे आप  शब्‍द.इन  प्लेटफॉर्म के निम्न लिंक पर जाकर  ऑनलान एडिशन  और  पेपरबैग  दोनों रूप में खरीद सकते हैं-

https://shabd.in/books/10078983

Amazon और Flipkart में भी उपलब्ध है 

कविता रावत

14 comments:

Sweta sinha said...

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार १ मार्च २०२२ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

Ravindra Singh Yadav said...

नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा मंगलवार (01 मार्च 2022 ) को 'सूनी गोदें, उजड़ी मांगे, क्या फिर से भर पाएंगी?' (चर्चा अंक 4356 ) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। 12:01 AM के बाद प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।

चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

#रवीन्द्र_सिंह_यादव

विभा रानी श्रीवास्तव said...

हार्दिक बधाई

सुशील कुमार जोशी said...

शुभकामनाएं।

Sudha Devrani said...

वाह!!!
बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं आपको।

अनीता सैनी said...

वाह!हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएँ आदरणीय कविता दी जी।
कितना सुखद होता है चुपके से उपहार मिलना।
सादर स्नेह

Rohitas Ghorela said...

ये उपहार वाकई न भुलाने वाला रहा. मुझे किताबें पढना बहुत पसंद हैं. आपकी ये किताब मैं जरुर पढूंगा.
आपको आपकी किताब के लिए ढेरों शुभकामनायें.
Welcome to my New post- धरती की नागरिक: श्वेता सिन्हा

Meena Bhardwaj said...

बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ कविता जी ।

जयकृष्ण राय तुषार said...

बहुत बहुत बधाई पुस्तक प्रकाशन हेतु।सादर अभिवादन कविता जी

संजय भास्‍कर said...

ढेरों शुभकामनाएँ आदरणीय कविता दी

Manoj said...

बहुत बहुत बधाई ,,,मनोज गुप्ता मोबाइल 8800098172

Unknown said...

ढेरों शुभकामनाएँ आदरणीय


Unknown said...

बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ कविता जी

Ankit Sachan said...

बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं आपको।