'ज' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-1) - Kavita Rawat Blog, Kahani, Kavita, geet, bhajan, Lekh, Yatra vritant, Sansmaran, Bacchon ka Kona
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मंगलवार, 14 जुलाई 2026

'ज' से शुरू होने वाले हिंदी मुहावरों की कविता (भाग-1)

जान हथेली पर लेकर जो आगे बढ़ते हैं,
जमीन-आसमान एक कर, सोए भाग्य जगाते हैं।

जान पर खेलना आदत जिनकी, वे कब डरते हैं,
जोश ठंडा पड़ने पर भी, जुटकर काम करते हैं।

जैसे-तैसे करके अपनी वो राह बनाते हैं,
जाल फेंके कोई कितना, वो जाल में न फँसते हैं।

जूते के बराबर जो न समझता था कभी उनको,
अपनी मेहनत से वे उसका, जोर चलना बंद करते हैं।

... कविता रावत

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