रावण वध देखने के उत्साह में उड़ जाती थी नींद - KAVITA RAWAT
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Thursday, October 22, 2015

रावण वध देखने के उत्साह में उड़ जाती थी नींद

सभी पाठकों को विजयादशमी की हार्दिक मंगलकामनाएं




29 comments:

L.S. Bisht said...

कविता जी बधाई । किसी भी लेख/फीचर के प्रकाशित होने का अपना ही आनंद है । इससे यह अधिक पाठकों तक पहुंचता है । दशहरे की उन यादों पर अच्छा लिखा है आपने ।

5th pillar corruption killer said...

bahut badhiya likhti hain aap !! bachpan ki yaaden taza ho gayin ji !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बृहस्पतिवार (22-10-2015) को "हे कलम ,पराजित मत होना" (चर्चा अंक-2137)   पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
विजयादशमी (दशहरा) की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 

RAJ said...

गांव की रामलीला जिसने एक बार देखी हो वह कभी नहीं भूल सकता.........पढ़ते पढ़ते यादों में खो गए हम और पहुँच गयी उस दौर में ................
दशहरा की शुभकामना ...

Unknown said...

बचपन में जब भी रामलीला होती हम बच्चे में आपस में खूब चर्चे करते स्कूल में, घर में ...यहाँ तक की रात को सपने में वही सीन दिखाई देते ......

vijay said...

रामलीला के बारे में पढ़कर मजा आ गया ..........................

हर साल रावण को जलाकर हम ख़ुशी मानते हैं और समझ बैठते हैं की हमने बुराई का अंत किया है, परन्तु रावण के अवगुणों पर ईमानदारी से गौर करते हुए आत्ममंथन किया जाय तो हम पाते हैं ये सभी बुराईयां तो हमारे अंदर भी हैं। जीवन में कितने ही अवसर पर हमारे अंदर छिपा रावण चुपके से अपना कमाल दिखा जाता है।

Jyoti Dehliwal said...

कविता जी, लेख प्रकाशित होने पर बहुत बहुत बधाई।

Jyoti Dehliwal said...

कविता जी, लेख प्रकाशित होने पर बहुत बहुत बधाई।

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुंदर .विजयादशमी की शुभकामनाएं !
नई पोस्ट : बीते न रैन

जमशेद आज़मी said...

सही कहा। सभी को दशहरे के मेले में जाने का इंतजार रहता है। खासकर बच्‍चों के लिए रावण वध कौतूहल का विषय होता है।

Mamta said...

रावण के बिना रामलीला अधूरी है
जोरदार पोस्ट ...
दशहरा की बधाई हो

Himkar Shyam said...

बहुत बढ़िया लिखा है आपने, प्रकाशन की बधाई। दशहरे की शुभकामनाएँ।

Pallavi saxena said...

मैंने कभी गाँव का दशहरा तो नहीं देखा। मगर आपने अपने बचपन की इस खूबसूरत याद को जिस तरह से यहाँ बखूबी उकेरा है उसके के लिए आपको धन्यवाद एवं बधाई।

Surya said...

हम भी डूब गए अपनी गांव की रामलीला में...................
जय जय सियाराम!
जय हनुमान!

DP said...

बधाई कविता जी ! आपकी लेखनी यूँ ही अखबारो की शोभा बढाती रहे ! शुभकामनाये :-)

जसवंत लोधी said...

बहुत सुन्दर रचना ।Seetamni. blogspot. in

Kailash Sharma said...

बचपन के दशहरे की यादें ताज़ा कर दीं. बहुत सुन्दर और रोचक आलेख...शुभकामनाएं!

Rajendra kumar said...

बेहतरीन प्रस्तुति, आभार आपका।

गिरधारी खंकरियाल said...

अब तो रामलीलाऔ मे भी वह आनन्द नही, जिसकी ऐसी प्रतीक्षा की जाय।

अभिषेक शुक्ल said...

दशहरे के मेले का तो आज भी बेसब्री से इंतजार रहता है..क्योंकि मेलों में आज भी दीखते हैं...वाही प्यारे खिलौने...गर्म जलेबियाँ....खट्टी चाट की दुकानें और उत्साही लोग...मेले अ का तो अपना अलग ही आनंद है।

Harshvardhan said...

आपने यह पोस्ट लिखकर मुझे उत्तराखंड की याद दिला दी जहाँ मैं रामलीलाओं का खुद बचपन में इतंजार करता रहता था | रामलीला देखने के लिए मैंने कई बार घर वालों के सामने बीमारी का बहाना बनाना पड़ता था तब कहीं दिन भर सो पाता था और पूरी रामलीला का लुफ्त उठाता था

रचना दीक्षित said...

दिल्ली में रामलीला और दशहरा का वो मज़ा ही नहीं.

महेन्‍द्र वर्मा said...

बधाई एवं शुभकामनाएं ।
हमने संस्कृति के जिस रूप को अपने बचपन में देखा है, हमारी परवर्ती पीढ़ी अब उसे कभी नहीं देख पाएगी ।

Jyoti khare said...

प्रभावी विवेचन
सार्थक प्रस्तुति
सादर

जसवंत लोधी said...

आपके कमेंट को हम अपने आगामी पोस्ट की हेडिंग बनाएगे Seetamni. blogspot. in

संजय भास्‍कर said...

लेख प्रकाशित होने पर डबल बहुत बहुत बधाई।

सविता मिश्रा 'अक्षजा' said...

बहुत बहुत बधाई..पर लेख पढ़ बी सकें सही से इसका भी इंतजाम करिए न

Anurag Choudhary said...

बहुत बहुत बधाई दीदी।

Unknown said...

आपका ब्लॉग पढ़ कर हमें अच्छा लगा। विजयादशमी और दशहरा क्यों मनाया जाता है इसकी जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पे विजिट करें ।
http://www.dishanirdesh.in/vijayadashmi-11-october-2016/