नेताजी सुभाषचंद्र बोस जयंती - KAVITA RAWAT
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Saturday, January 23, 2016

नेताजी सुभाषचंद्र बोस जयंती

उड़ीसा की राजधानी और महानदी के तट पर बसे कटक नगर में रायबहादुर जानकीनाथ बोस के यहाँ 23 जनवरी, 1897 को सुभाष बाबू का जन्म उस समय हुआ जब देश पराधीनता की बेडि़यों में जकड़ा हुआ था। भारतीय राष्ट्रीय कांगे्रेस की स्थापना हो चुकी थी। देश में राजनैतिक चेतना आ रही थी। उनकी माता प्रभावती बोस पुराने कट्टर धार्मिक विचारों में विश्वास रखनी वाली महिला होने के बावजूद भी सरल हृदय, अच्छे स्वभाव वाली सीधी-साधी महिला थी। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की पांच बहनें और छः भाई थे। संपन्न परिवार के होने के बावजूद नेताजी स्वार्थ और लालच जैसी बुराई से कोसों दूर थे। 
नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने जाति-पांति के भेदभाव को कभी भी महत्व नहीं दिया। वे हिन्दू-मुसलमानों में भेद नहीं रखते थे। दोनों को भाई मानते थे। इसका एक उदाहरण है- एक दिन उनकेे मोहल्ले में छोटी जाति के एक व्यक्ति ने  उनके घर वालों को खाने पर बुलाया। सबने न जाने का निश्चय किया, लेकिन सुभाष बाबू ने अपने माता-पिता की आज्ञा का उल्लंघन कर उनके यहां जाकर खाना खाया। एक अन्य प्रसंग पर कटक में हैजे के दौरान उन्होंने रोगियों की घर-घर जाकर सेवा की। इस रोग से पीडि़त एक गुण्डे हैदर के घर जब कोई डाॅक्टर, वैद्य उनके बुलावे पर नहीं आये तो उन्होंने स्वयं उसके घर जाकर अपने साथियों के साथ मिलकर उसके घर की साफ सफाई की, जिसे देखकर वह कठोर हृदय वाला गुण्डा द्रवित होकर एक कोने में जाकर रोने लगा। उसे बड़ी आत्मग्लानि हुई। तब नेता सुभाषचंद जी ने उसे सिर पर हाथ फेरते कहा-“ भाई तुम्हारा घर गंदा था, इसलिए इस रोग ने तुम्हें घेर लिया। अब हम उसकी सफाई कर रहे हैं। दूसरों के सुख-दुःख में जाना तो मनुष्य का कर्तव्य है।“ यह सुनकर हैदर से उनके पांव पकड़ कर बोला-“ नहीं, नहीं मेरा घर तो गंदा था ही, मेरा मन उससे भी ज्यादा गंदा था। आपकी सेवा ने मेरी गंदगी को निकाल दिया। मैं किस मुंह से आपको धन्यवाद दूं। परमात्मा करें आपकी कीर्ति संसार के कोने-कोने में फैले।“   
          नेताजी के भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु अमूल्य योगदान के लिए हम सभी सदैव ऋणी रहेंगे। उनके जैसे ओजस्वी वाणी, दृढ़ता, स्पष्टवादिता और चमत्कारी व्यक्तित्व वाले लोकप्रिय नेता की आज सर्वथा कमी महसूस होती है। स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु उनका भारतवासियों का उद्बोधन भला कौन भुला सकता है-“ अब आपका जीवन और आपकी सम्पत्ति आपकी नहीं है, वह भारत की है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यदि आप इस सरल सत्य को समझते हैं कि हमें किसी भी उपाय से स्वतंत्रता प्राप्त करनी है और अब हम एक ऐसे स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में हैं जो युद्ध की स्थिति में है तब आप सहज ही समझ जायेंगे कि कुछ भी आपका नहीं है। और आपका जीवन, धन, सम्पत्ति कोई भी चीज आपकी नहीं है। आपके लिए स्पष्टतः दूसरा रास्ता खुला हुआ है। वही रास्ता जो अंग्रेजों द्वारा अपनाया गया था। स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए कोई मध्य स्थिति नहीं हो सकती। तुम सभी को स्वतंत्रता के लिए पागल बनना होगा। तुम में से किसी को भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़े जाने वाले इस युद्ध में केवल अपनी सम्पत्ति का पांच प्रतिशत और दस प्रतिशत देने के अर्थों में सोचने का अधिकार नहीं है। हजारों संख्या मंे जो वीर सैनिक भारत को स्वतंत्र करने के लिए सेना में भर्ती हुए हैं, वे इस बात का भाव-ताव नहीं करते कि हम रणभूमि में केवत पांच प्रतिशत ही अपना खून बहायेंगे। सच्चे देशभक्त सैनिक का अमूल्य जीवन एक करोड़ रुपये से भी अधिक कीमती है। तब आप लोग जो धनवान हैं, उन्हें क्या अधिकार है कि वे मोल-भाव करें और कहंे कि हम अपनी सम्पत्ति का केवल अमुक प्रतिशत ही देंगे। ’करो सब निछार-बनो सब फकीर।’ मैं आप सभी लोगों से यही चाहता हूं। भारत की स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व दे डालो और फकीर बन जाओ। वह बहुत त्याग नहीं है। मुझे अपना खून दो और मैं तुम्हें स्वतंत्रता देने का वचन देता हूँ।“
 सुभाषचन्द्र जयंती पर सादर श्रद्धा सुमन अर्पण सहित..



17 comments:

vijay said...

सार्थक सामयिक लेखन ...
सुभाषचन्द्र जयंती पर सार्थक याद ...
सुभाष जी को नमन!!!!!!!!!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (23-01-2016) को "कुछ सवाल यूँ ही..." (चर्चा अंक-2231) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Unknown said...

"मुझे अपना खून दो और मैं तुम्हें आजादी दूंगा"
अमर वीर भारत माता के लाडले को सादर नमन ...........

Surya said...

सुन्दर
नेताजी को नमन!!

विरम सिंह said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 24 जनवरी 2016 को लिंक की जाएगी...............http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

HARSHVARDHAN said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन - नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती और रहस्य में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Harshvardhan Srivastav said...

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी को शत शत नमन। सादर।।

नेताजी से जुड़ी 100 सीक्रेट फाइलों को भारत सरकार ने सार्वजनिक किया

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति.
नई पोस्ट :
लेखक से बड़ा होता किरदार

गिरधारी खंकरियाल said...

नेताजी को सादर नमन।

प्रवीण पाण्डेय said...

नेताजी की सामाजिक चिन्तन एक सुलझे नेता की तरह था।

संजय भास्‍कर said...

सुभाष चन्द्र बोस जी को शत शत नमन।

दिगम्बर नासवा said...

शत शत नमन ... जय हिन्द के नारे के साथ नेता जी अमर हैं सभी के दिल में ... बहुत सुन्दर आलेख ...

TeckKept said...

Very Nice Post....

लेकिन आप अभी भी अपनी Website में बहुत सी गलतियाँ कर रहें है | Really आपको अपने Blog में बहुत से सुधार करने की जरूरत है. For Get Success In Blogging Please visit : http://techandtweet.in

Amrita Tanmay said...

नेताजी सच में नेताजी हैं ।

Kali ki kavitay(kali das tamrakar) said...

नेता जी देश के सच्चे वीर सिपाही है

Jyoti Dehliwal said...

कविता, नेताजी का जिवन परिचय बहुत ही सुंदर तरिके से व्यक्त किया है आपने।

kuldeep thakur said...

जय मां हाटेशवरी....
हर्ष हो रहा है....आप को ये सूचित करते हुए.....
दिनांक 23/01/2018 को.....
आप की रचना का लिंक होगा.....
पांच लिंकों का आनंद
पर......
आप भी यहां सादर आमंत्रित है.....