जब मैं मायूस होती हूँ तो याद आता है माँ का संघर्ष - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Monday, May 9, 2016

जब मैं मायूस होती हूँ तो याद आता है माँ का संघर्ष


18 comments:

  1. माँ का साथ कदम-कदम पर मिलता है
    प्रेरक लेखन ..हार्दिक बधाई

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  2. सुन्दर लेख !
    बधाई हो कविता जी

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  3. माँ महान होती हैं ।आपने उनकी जिजीविषा का भावपूर्ण चित्रण किया है ।माँ को नमन ।

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  4. माँ महान होती हैं ।आपने उनकी जिजीविषा का भावपूर्ण चित्रण किया है ।माँ को नमन ।

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  5. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्मदिवस - महाराणा प्रताप, गोपाल कृष्ण गोखले और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  6. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (11-05-2016) को "तेरी डिग्री कहाँ है ?" (चर्चा अंक-2339) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  8. वाह बहुत ही बेहतरीन निश्चित रूप से प्रिंट के पाठकों तक पहुंचना चाहिए था ...बहुत ही अच्छा ..| जारी रहिये

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  9. भावनाओ से ओत प्रोत किन्तु मार्गदर्शक व प्रेरणास्रोत भी।

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  10. बहुत ही ह्दय स्पशीॅ लेख।माता जी के स्वास्थ्य के लिए मै ईशवर से प्रार्थना करूँगी।

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  11. कविता जी, ईश्वर से प्रार्थना करती हु की आपकी मम्मी को स्वास्थ्य लाभ हो।

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  12. Proud of your mother....
    Praying to God for her...

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  13. Proud of your mother....
    Praying to God for her...

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  14. बहुत ही संवेदनशील रचना। माँँ.....
    सम्मान रूप क्या पानी दूँ ,इस जननी रूपी झरने को।

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  15. बहुत ही सुन्दर रचना....कविता जी आपका यह लेख बहुत ही भावपूर्ण व एक माँ के कर्तव्यों का वर्णन है कि किस तरह से एक माँ अपनी परवाह किये बिना अपने कर्तव्यों का पालन करना नही भूलती.......आप ऐसी रचनाओं को शब्दनगरी में भी प्रकाशित कर शब्दनगरी पाठकों को भी ऐसी रचनाओं का आनंद लेने दें......

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