एक मेरा ख़्वाब है जो बदलता भी नहीं है - KAVITA RAWAT
ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Tuesday, October 18, 2022

एक मेरा ख़्वाब है जो बदलता भी नहीं है

जो तेरे घर से निकलता भी नहीं है

वो मेरी दहलीज़ पे चढ़ता भी नहीं है


कहते हैं लोग मेरे सीने में मौजूद है

मेरी मर्जी से मगर ये धड़कता भी नहीं है


मैं भी दिन और रात का पाबंद हूँ

मुझसे तो सूरज कभी ढलता भी नहीं है


आ जाती हैं यादें कोई बहाना लेकर

दिल मेरे दिल की तरह चलता भी नहीं है


कश्ती सवार को साहिल दिखाई तो देता है

इस दरिया के किस्मत में समंदर भी नहीं है


हाथ मिलाया ज़िन्दगी से और बिक गए

चैन से जीने का अब तो वक़्त भी नहीं है


कैसे कह दूँ मुहब्बत का बीमार नहीं हूँ

चिराग़ है ऐसा जो अब जलता भी नहीं है


मैंने 'आसिफ' दुनिया को बदलते देखा है

एक मेरा ख़्वाब है जो बदलता भी नहीं है

...मुहम्मद आसिफ अली

9 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 19 अक्टूबर 2022 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. कविता रावत जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद। आप बहुत अच्छा लिखती हैं। मैं आशा करता हूँ कि आप भविष्य में और अधिक कामयाबी हासिल करेगीं।

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  3. मैंने 'आसिफ' दुनिया को बदलते देखा है,

    एक मेरा ख़्वाब है जो बदलता 'ही' नहीं है !

    लगता है मुझ पर भी लागू होता है !😊🙏

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  4. बेहद शानदार गज़ल।
    हर शेर लाज़वाब है।
    सादर।

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  5. खूबसूरत फ़लसफ़ा.शानदार गज़ल।

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  6. बहुत शानदार गजल।

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  7. सुन्दर रचना । दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ l

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  8. दीपावली की आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं।

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