ऐसा मिलकर कोई दीप जलायें - KAVITA RAWAT
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गुरुवार, 4 नवंबर 2010

ऐसा मिलकर कोई दीप जलायें

अँधियारा मिटाने आया दीपपर्व
आओ मिलकर पूजा थाल सजायें
फैले उजियारा हर घर आँगन
ऐसा मिलकर कोई दीप जलायें!

गाँव-शहर में फैले खुशहाली
दु:खिया के घर भी मने दीवाली
मुरझाये चेहरों पर खुशियाँ लायें
ऐसा मिलकर कोई दीप जलायें!

ऊँच-नीच, जात-पात खाई पाटकर
सदभाव, समभाव प्रकाश फैलायें
ऐसा मिलकर कोई दीप जलायें!

न हो कोई अपने घर में बेघर
बड़े-बुजुर्गों से न रहे कोई बेखबर
रखे ख्याल कोई दिल न दु:खायें
ऐसा मिलकर कोई दीप जलायें!

कर अहंकार, प्रपंच, स्वार्थ दमन
फिर रामराज सा करें नव-सृजन
मिटा अनाचार,भ्रष्टता, निकृष्टता
सर्वहित संकल्प दीपोत्सव मनायें
ऐसा मिलकर कोई दीप जलायें!

सबको दीपपर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ
                        ..कविता रावत